Hazaribagh : जिले में भूमि निबंधन की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और विवादमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. समाहरणालय भवन में उपायुक्त हेमन्त सती की अध्यक्षता में अवर निबंधक के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली हेराफेरी, फर्जीवाड़े और कानूनी अड़चनों को जड़ से खत्म करना है. उपायुक्त ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया है कि अब कानून और नियमों के दायरे में रहकर ही हर एक फाइल आगे बढ़ेगी, किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
ऑनलाइन पेमेंट की संतुष्टि के बाद ही बढ़ेगी फाइल
जमीन के फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए उपायुक्त ने सख्त हिदायत दी है. अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसके लैंड पजेशन सर्टिफिकेट और अन्य सभी जरूरी कागजातों का ऑनलाइन सत्यापन करना अनिवार्य होगा. उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान सीधे राजस्व अभिलेखों से किया जाएगा. इसके अलावा उपायुक्त ने अवर निबंधक को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निबंधन के दौरान ली जाने वाली सरकारी राशि का ऑनलाइन माध्यम से खुद मिलान कर लें और जब पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं, तभी प्रक्रिया को अंतिम रूप दें.

शपथ-पत्र और जॉइंट LPC पर विशेष नजर
बैठक में जमीन के पारिवारिक विवादों और हिस्सेदारी को लेकर कई महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की गईं. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि शपथ-पत्र, नोटरी और संयुक्त LPC से जुड़े मामलों में अधिकारी अतिरिक्त सतर्कता बरतें. यदि किसी दस्तावेज पर थोड़ा भी संदेह या त्रुटि नजर आती है, तो पहले उसकी कानूनी जांच होगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा अब भूमि के सभी हिस्सेदारों की मौजूदगी या उनका अनापत्ति प्रमाण पत्र होना जरूरी होगा. रैयतों और जमीन मालिकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी की गई वैध वंशावली ही प्रस्तुत करें.
कोर्ट में लंबित और विवादित जमीनों पर रहेगी पाबंदी
अक्सर देखा जाता है कि कोर्ट में चल रहे मामलों के बावजूद जमीनों की रजिस्ट्री कर दी जाती है, जिससे बाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होती है. इसे रोकने के लिए सिविल कोर्ट में लंबित मामलों से संबंधित जमीनों की विधिक स्थिति का समुचित परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है. उपायुक्त ने साफ कहा कि विवादित या न्यायालय में विचाराधीन जमीनों पर नियमानुसार ही सख्त कार्रवाई की जाए. बैठक के अंत में पूरी व्यवस्था को जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए विभागीय तालमेल को मजबूत करने पर बल दिया गया. अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया गया कि वे सरकारी प्रावधानों और कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन करते हुए सभी लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करें.
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