Palamu: जिले के मनातू प्रखंड के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की लचर और बदहाल व्यवस्था को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है. विभाग की आए दिन सामने आ रही लापरवाहियों के कारण अब ग्रामीण सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह दूरी बनाने को मजबूर हो रहे हैं. ताजा मामला एक मासूम बच्चे को एक्सपायरी (तय समय सीमा पार) दवा देने का है, जिससे बच्चे की जान पर बन आई.
5 वर्षीय बच्चे को दी गई एक्सपायरी दवा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनातू प्रखंड अंतर्गत मझौली पंचायत निवासी बृजेश यादव का 5 वर्षीय पुत्र सुशील कुमार पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था. परिजन उसे इलाज के लिए मनातू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे. वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चे की जांच के बाद उसे पीने के लिए एक सिरप (दवा) दी. घर पहुंचकर जैसे ही परिजनों ने वह दवा सुशील को पिलाई, कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई. मासूम को लगातार उल्टियां होने लगीं और वह घबराहट से तड़पने लगा.

दवा की एक्सपायरी डेट देखकर उड़े होश
जब बच्चे की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने आनन-फानन में दवा की शीशी पर छपी तारीख देखी, तो उनके होश उड़ गए. स्वास्थ्य केंद्र द्वारा दी गई वह दवा पूरी तरह एक्सपायर हो चुकी थी. इसके बाद परिजनों ने बिना समय गंवाए बच्चे को एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया, जहां समय रहते उचित इलाज मिलने के बाद उसकी जान बचाई जा सकी.
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पिता ने जताया आक्रोश
पीड़ित बच्चे के पिता बृजेश यादव ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में कहा कि यदि उन्होंने समय रहते अपने बच्चे को किसी दूसरी जगह नहीं दिखाया होता, तो शायद इस घोर लापरवाही के कारण आज उन्हें अपने जिगर के टुकड़े से हाथ धोना पड़ता. सरकारी अस्पताल में इस तरह की जानलेवा लापरवाही होना बेहद शर्मनाक है.
जांच और कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मनातू स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा एक्सपायरी दवा बांटने वाले दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.


