Ranchi: माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ने की दिशा में मंगलवार का दिन सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी भरा रहा. एक तरफ जहां लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ माओवादी नेता माधई पात्रा ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, वहीं दूसरी ओर कोलकाता पुलिस ने झारखंड की मोस्ट वांटेड महिला माओवादी श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है.
एक करोड़ इनामी मिसिर बेसरा की अनुमति के बाद माधई पात्रा का सरेंडर
हुगली जिले के जांगीपाड़ा निवासी माधई पात्रा ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपने हथियार डाल दिए. पात्रा पिछले कई दशकों से बिहार, ओडिशा, झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी संगठनों के लिए काम कर रहे थे. मीडिया से बात करते हुए माधई ने बताया कि उनकी शारीरिक स्थिति काफी समय से ठीक नहीं थी. लगातार गिरते स्वास्थ्य के कारण उन्होंने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया. चौंकाने वाली बात यह रही कि माधई ने यह कदम संगठन के इनचार्ज मिहिर बेसरा की अनुमति के बाद उठाया. उन्होंने बताया मैंने अपनी अस्वस्थता के बारे में इनचार्ज को सूचित किया था, जिसके बाद उन्होंने मुझे मुख्यधारा में लौटने की इजाजत दे दी.

भांगड़ से दबोची गई 15 लाख की इनामी बेला
माधई के सरेंडर के बीच कोलकाता पुलिस ने एक और नक्सली को गिरफ्तार किया. उत्तर काशीपुर इलाके में छापेमारी कर कुख्यात माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को गिरफ्तार किया गया. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बताया कि श्रद्धा विश्वास झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था. उसके खिलाफ झारखंड में हत्या और तोड़फोड़ समेत कम से कम 23 मामले दर्ज हैं. बेला बंगाल और झारखंड के बीच माओवादी गतिविधियों के तालमेल का काम करती थी. झारखंड में पुलिसिया दबाव बढ़ने के बाद वह भागकर बंगाल आ गई थी और भांगड़ के उत्तर काशीपुर में छिपकर रह रही थी.
