Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (Vinoba Bhave University-VBU) एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों में कथित वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities), छात्रों के आर्थिक शोषण और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों को लेकर एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में है. सामाजिक कार्यकर्ता चंदन सिंह ने झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति (Chancellor) को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में सामने आए विभिन्न मामलों की स्वतंत्र उच्च स्तरीय अथवा न्यायिक जांच कराने की मांग की है. ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पिछले कई महीनों से विभिन्न मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ शिकायतें की गईं. कई मामलों में जांच समितियां भी गठित हुईं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, न प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई.
कार्रवाई पर सवाल
चंदन सिंह का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. उनका आरोप है कि शिकायतों को दबाने और जिम्मेदार लोगों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कुलाधिपति से स्वयं हस्तक्षेप कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है.

शुल्क वसूली का आरोप
ज्ञापन में पहला मामला विधि महाविद्यालय, कोडरमा से जुड़ा है. आरोप लगाया गया है कि छात्रों से विभिन्न मदों में कथित रूप से मनमानी और अवैध शुल्क वसूला जा रहा है. आवेदन के अनुसार आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिए जाने के साथ कुछ छात्रों से शपथपत्र लेकर भविष्य में बोनाफाइड प्रमाण-पत्र (Bonafide Certificate) की मांग नहीं करने जैसी शर्तें भी लगाई जा रही हैं. साथ ही यह भी जांच का विषय बताया गया है कि जिन मदों में छात्रों से शुल्क लिया जा रहा है, उन्हीं मदों के लिए सरकार से छात्रवृत्ति अथवा अन्य योजनाओं के तहत राशि प्राप्त हो रही है या नहीं.
ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल
ज्ञापन में विश्वविद्यालय की ऑनलाइन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं. कहा गया है कि छात्र ऑनलाइन नामांकन और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए अलग से साइबर कैफे को भुगतान करते हैं, इसके बावजूद विश्वविद्यालय अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा है. इसके अलावा कोविड-19 के बाद विश्वविद्यालय द्वारा एडमिट कार्ड (Admit Card) उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे छात्रों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है. इन सभी शुल्कों और खर्चों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है.
CCTV खरीद की जांच की मांग
ज्ञापन में जगन्नाथ जैन महाविद्यालय, कोडरमा के बीएड विभाग में करीब 3.20 लाख रुपये की सीसीटीवी (CCTV) खरीद को भी जांच का विषय बनाया गया है. आरोप लगाया गया है कि खरीद प्रक्रिया बिना सक्षम स्वीकृति, बिना वैधानिक निविदा प्रक्रिया और बिना जेम पोर्टल (GeM Portal) अपनाए की गई. बाद में प्रक्रिया को वैध दिखाने का प्रयास किया गया. शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
परीक्षा शुल्क का मामला
चौथा मामला विश्वविद्यालय के परीक्षा फॉर्म शुल्क से संबंधित बताया गया है. आरोप है कि हजारों छात्रों द्वारा जमा की गई परीक्षा शुल्क की राशि विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं होने की शिकायत सामने आई थी. इस मामले में जांच समिति गठित होने के बावजूद आज तक न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की गई.
ऑडिट और FIR की मांग
चंदन सिंह ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी, विशेष जांच दल (SIT) अथवा उच्च स्तरीय न्यायिक जांच समिति से जांच कराई जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों से अलग किया जाए. विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के वित्तीय लेन-देन, शुल्क वसूली, छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क और खरीद प्रक्रियाओं का विशेष ऑडिट (Special Audit) कराया जाए. साथ ही पूर्व में गठित जांच समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक कर, जहां प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, वहां तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए.
छात्रों के भविष्य का सवाल
चंदन सिंह ने कहा कि यह केवल कुछ संस्थानों का मामला नहीं है, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है. इसलिए कुलाधिपति से शीघ्र हस्तक्षेप कर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की गई है.
आंदोलन की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो छात्रहित और जनहित में चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित सरकार की होगी.


