Ranchi: झारखंड में इस बार मॉनसून ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. जून का महीना लगभग बीतने को है, लेकिन राज्य के आसमान से राहत की बूंदें गिरने के बजाय खामोशी बरसी है. 1 से 26 जून तक के आंकड़े बताते हैं कि पूरा राज्य वर्षा की कमीकी चपेट में है. किसानों के खेत प्यासे हैं और जलाशयों का जलस्तर नीचे जा रहा है, जिससे राज्य में सूखे का संकट गहराता दिख रहा है.
अब तक 61 फीसदी कम बारिश
समूचे झारखंड का औसत वर्षा विचलन -61% है, मतलब अब तक 61 फीसदी कम बारिश हुई है. जो इसे स्कैंटी (बहुत कमी) श्रेणी में खड़ा करता है. जून के 26 दिनों में 149.8 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले मात्र 59 मिमी बारिश ही दर्ज हो सकी है. राज्य के किसान, जिनकी खेती पूर्णतः मॉनसून पर आधारित है, वे अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.

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साहिबगंज और गढ़वा में बूंदों के लाले
राज्य के 24 जिलों में से केवल दुमका’ जिला एकमात्र ऐसा स्थान है जो सामान्य वर्षा (-19%) के करीब है. बाकी सभी 23 जिलों में बारिश का आंकड़ा डरावना है. गढ़वा (-98%) और साहिबगंज (-98%) में तो जैसे बारिश हुई ही नहीं. चतरा (-94%), पलामू (-86%), सरायकेला-खरसावां (-82%), लोहरदगा (-80%), और कोडरमा (-79%) की स्थिति सबसे भयावह है. इन क्षेत्रों में सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई है.
कमी वाले जिले
धनबाद (-58%), गिरिडीह (-58%), रामगढ़ (-52%), गुमला (-45%), जामताड़ा (-28%), और रांची (-21%) जैसे जिलों में भी बारिश का ग्राफ काफी नीचे है। इन इलाकों में भी सामान्य वर्षा का लक्ष्य कोसों दूर है.


