Bokaro: बीएसएल प्लांट के स्लेग डंप एरिया क्षेत्र से स्लेग लदे भारी वाहनों के परिचालन को लेकर ग्रामीणों की बंदी दूसरे दिन भी जारी रही. भारी वाहनों के परिचालन के कारण तुपकाडीह तेनु नहर सड़क मार्ग जर्जर हो गई है. उड़ती धूल-मिट्टी से उत्पन्न प्रदूषण, बाधित यातायात तथा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ ग्रामीणों ने शनिवार को भी विरोध जारी रखा. इस संबंध में बीरबल मरांडी ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाता और आसपास के लोगों को राहत नहीं मिलती, तब तक स्लेग लदे भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी.
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प्रदूषण और मनमानी का लगाया आरोप
इधर युवकों द्वारा उठाई गई आवाज को ग्रामीणों व बाजारवासियों ने जायज बताया. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अपनी जमीन देकर उन्होंने प्लांट की स्थापना में सहयोग किया, लेकिन अब प्रबंधन और ठेकेदारों की मनमानी का खामियाजा विस्थापितों को प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ रहा है. कहा कि स्लेग ढुलाई के दौरान उड़ने वाली धूल-मिट्टी से पूरा वातावरण प्रदूषित हो जाता है. गांव के पेड़-पौधों की पत्तियां काली पड़ चुकी हैं. घरों की छतों पर धूल और मिट्टी की मोटी परत जम जाती है. इतना ही नहीं, खुले कुओं का पानी भी प्रदूषित हो रहा है.
ओवरलोड वाहनों पर भी जताई चिंता
कहा कि यह सड़क हर दिन प्लांट कर्मचारियों, ठेका मजदूरों और आसपास बसे गांवों के लोगों के लिए मुख्य मार्ग है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई हाइवा वाहन ओवरलोड स्लेग लेकर खुले में परिवहन करते हैं, जो खतरे की घंटी साबित हो सकता है. इस धंधे के संचालनकर्ता के रूप में स्थानीय दलाल तबके के लोगों को बंधी-बंधाई राशि मिलती है. मौके पर राजन कर्मकार, रसिक हेंब्रम, बहादुर मांझी, विंतोष सोरेन, विश्वजीत सोरेन, गोतम कर्मकार, हीरालाल सोरेन, सुभाष सोरेन, मोहन कर्मकार, जोगेंद्र सोरेन आदि मौजूद थे.
