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मुकेश अंबानी के संकटमोचक परिमल नाथवानी फिर पहुंचे राज्यसभा, जानिए कौन हैं सियासत और कॉर्पोरेट जगत के यह सुपर ऑलराउंडर

Ranchi: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर जारी सियासी सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है. इस चुनावी दंगल में सबसे...

Parimal Nathwani
परिमल नाथवानी

Ranchi:  झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर जारी सियासी सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है. इस चुनावी दंगल में सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है. उन्होंने कड़े मुकाबले में कांग्रेस के रणनीतिकार प्रणव झा को शिकस्त देकर चौथी बार देश के उच्च सदन का टिकट पक्का कर लिया. इस बड़ी जीत के बाद राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है, आखिर परिमल नाथवानी के पास वो कौन सी जादुई पारस पत्थर है, जो उन्हें हर बार जीत का सेहरा पहना देती है? दरअसल, नाथवानी की सबसे बड़ी खूबी उनकी ‘क्रॉस-पार्टी’ स्वीकार्यता है. वे किसी एक विचारधारा के दायरे में नहीं बंधते, बल्कि हर राजनीतिक दल में उनके गहरे और दोस्ताना संबंध हैं. यही वजह है कि वे लगातार संसद पहुंच रहे हैं.

मुकेश अंबानी के संकटमोचक और रिलायंस के थिंक टैंक

परिमल नाथवानी को करीब से जानने वाले उन्हें एक बेहतरीन ऑलराउंडर मानते हैं, जिन्होंने बिजनेस से लेकर राजनीति तक हर पिच पर चौके-छक्के लगाए हैं. कॉर्पोरेट जगत में उनका रुतबा बेहद खास है. वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर हैं. नाथवानी को रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी और राइट हैंड माना जाता है. गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी को धरातल पर उतारने और उसके विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालने के पीछे नाथवानी का ही विजनरी दिमाग रहा है.

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दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के शिल्पकार

बिजनेस और पॉलिटिक्स के अलावा नाथवानी का खेल की दुनिया में भी बड़ा दबदबा है. वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं. अहमदाबाद के विश्व प्रसिद्ध नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ (मोटेरा) को नया कलेवर देने और उसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने के ड्रीम प्रोजेक्ट की कमान उन्हीं के हाथों में थी. उनकी शख्सियत का एक और खूबसूरत पहलू उनका प्रकृति प्रेम है. वे गुजरात के गिर जंगलों में रहने वाले एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए समर्पित भाव से काम करते हैं. वन्यजीवों की सुरक्षा और गिर नेशनल पार्क के इको-सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए वे राष्ट्रीय स्तर पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं.

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