Giridih: जिले के सदर अस्पताल में आयुष्मान मित्र की बहाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. 4 जून 2026 को जारी चयन सूची और स्किल टेस्ट की मार्कशीट ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि मेरिट को दरकिनार कर सेटिंग और सिफारिश के आधार पर चयन किया गया. स्थिति ऐसी है कि 30 अंकों की परीक्षा में 56.7 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया, जबकि मात्र 20 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया.
टॉपर बाहर, कम अंक वाले अंदर
स्किल टेस्ट में सबसे अधिक 17 अंक (56.7 प्रतिशत) हासिल करने वाले अफसर अंसारी को प्रतीक्षा सूची में रखा गया. वहीं 8 अंक (26.7 प्रतिशत) प्राप्त करने वाली आँचल कुमारी और 6-6 अंक (20 प्रतिशत) पाने वाले प्रदीप मंडल व मो. इमरान अली को चयनित कर लिया गया. इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालों का तूफान खड़ा हो गया है.


शून्य अंक वालों को नौकरी, अधिक अंक वालों को इंतजार
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हिंदी टाइपिंग में शून्य अंक प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया, जबकि कई अन्य अभ्यर्थियों को समान या अधिक अंक होने के बावजूद प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया. इससे चयन के मानदंडों को लेकर संदेह और गहरा गया है.
50 प्रतिशत वाले दो उम्मीदवार
मनीष कुमार वर्मा और अनिल कुमार दास दोनों को 15-15 अंक यानी 50 प्रतिशत प्राप्त हुए. लेकिन मनीष कुमार वर्मा चयनित हो गए, जबकि अनिल कुमार दास को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया. समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग निर्णय ने पूरे चयन तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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बर्खास्त कर्मी भी चयनित!
मामले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. प्रदीप मंडल, जिसे 4 मई 2026 को कथित रूप से 2500 रुपये रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद पत्रांक-1209 के तहत बर्खास्त किया गया था, उसका नाम भी चयनित सूची में शामिल कर दिया गया. बाद में सिविल सर्जन ने उसकी बहाली रद्द कर दी. सवाल यह है कि बर्खास्त व्यक्ति का नाम चयन सूची तक पहुंचा कैसे?
परिजनों की तैनाती पर भी उठे सवाल
चयनित अभ्यर्थी आँचल कुमारी के पिता विजय रवानी पहले से पीएचसी गांडेय में कार्यरत हैं, जबकि उनके भाई कृष्णा रवानी एमसीएच चैताडीह में तैनात हैं. ऐसे में चयन प्रक्रिया को लेकर पक्षपात और प्रभाव के आरोप भी सामने आने लगे हैं.
अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश
प्रतीक्षा सूची में रखे गए अभ्यर्थी अफसर अंसारी ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब 56.7 प्रतिशत अंक लाने वाला बाहर है और शून्य अंक वाले चयनित हैं, तो यह साफ तौर पर मेरिट की अनदेखी है. उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और मेरिट आधारित बहाली की मांग की है.
सिविल सर्जन ने दिए जांच के संकेत
सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि आयुष्मान मित्र चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं. पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
क्या सदर अस्पताल में आयुष्मान मित्र की बहाली मेरिट के आधार पर हुई या फिर सेटिंग-सिफारिश ने योग्यता को कुचल दिया? अब सबकी नजर प्रस्तावित जांच पर टिकी है. यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक बहाली विवाद नहीं होगा, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा.
