झारखंड ई-रेवेन्यू कोर्ट: 2.76 लाख से अधिक मामलों में 80% का निष्पादन, सिमडेगा अव्वल तो जामताड़ा फिसड्डी 

Manish Bhardwaj Ranchi: झारखंड में राजस्व संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू की...

Manish Bhardwaj

Ranchi: झारखंड में राजस्व संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-रेवेन्यू कोर्ट व्यवस्था के परिणाम धरातल पर दिखने लगे है. डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बढ़ते हुए राज्य ने जमीन, सर्टिफिकेट केस और अन्य राजस्व मामलों के बोझ को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के सभी 24 जिलों को मिलाकर ई-रेवेन्यू कोर्ट में अब तक कुल 2,76,699 मामले दर्ज किए जा चुके है. इनमें से 2,20,794 मामलों का निष्पादन (निपटारा) कर दिया है. वर्तमान में राज्यभर में 55,905 मामले अभी भी लंबित हैं, जो कुल मामलों का लगभग 20.20 प्रतिशत है.

सिमडेगा, लातेहार और पाकुड़ ने मारी बाजी 

इस रेस में सिमडेगा जिला पूरे झारखंड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ शीर्ष पर काबिज है. सिमडेगा में ई-रेवेन्यू कोर्ट के सामने कुल 6,412 मामले आए थे, जिनमें से रिकॉर्ड 6,254 मामलों का निपटारा कर दिया गया है. सिमडेगा का डिस्पोजल रेट यानी मामलों के निष्पादन का प्रतिशत 97.54% है, वहीं यहां महज 2.46 फीसदी (158 मामले) ही लंबित है. इस सूची में दूसरे स्थान पर लातेहार जिला है, जिसने 94.57% मामलों का निष्पादन कर दिया है. लातेहार में 4,973 मामलों में से 4,703 का निपटारा हो चुका है और सिर्फ 270 मामले लंबित है. तीसरे स्थान पर पाकुड़ जिला है, जिसने 94.18% के निपटारे की दर के साथ 4,826 मामलों में से 4,545 को बंद कर दिया है. कोडरमा (94.11%) और पलामू (91.59%) ने भी 90 फीसदी से अधिक का स्कोर हासिल कर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शीर्ष जिलों में अपनी जगह बनाई है.

जामताड़ा और देवघर का सबसे खराब प्रदर्शन 

जामताड़ा में रफ्तार इतनी धीमी है कि वहां आधे से अधिक मामले लंबित हैं. जिले में कुल 7,376 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से केवल 3,855 मामलों का ही निष्पादन हो सका है. जामताड़ा का निष्पादन प्रतिशत महज 52.26% है, 47.74% यानी लगभग आधे मामले (3,521 केस) आज भी लंबित हैं. वहीं देवघर में कुल 9,501 मामलों में से केवल 6,643 का ही निपटारा हो पाया है. यहां का निष्पादन प्रतिशत 69.92% है, जबकि 30.08% (2,858 मामले) अभी भी पेंडिंग हैं. साहिबगंज (73.97%), धनबाद (74.92%) और हजारीबाग (75.50%) भी राज्य के औसत प्रदर्शन (79.80%) से काफी पीछे चल रहे है.

राजधानी रांची पर मुकदमों का बोझ, हजारीबाग भी पीछे नहीं 

राज्य के कुल मामलों (2.76 लाख) में से अकेले रांची जिले में 84,835 मामले दर्ज हैं. यानी पूरे राज्य के करीब 30 फीसदी मामले अकेले राजधानी में हैं. रांची जिला प्रशासन ने इस भारी दबाव के बीच 65,034 मामलों का निष्पादन करने में सफलता पाई है, जो कि 76.66% है। हालांकि, संख्या बल के हिसाब से देखें तो रांची में अब भी 19,801 मामले लंबित हैं, जो राज्य के किसी भी अन्य जिले की कुल केस संख्या से भी ज्यादा है. वहीं हजारीबाग में कुल 24,054 मामले सामने आए, जिनमें से 18,161 का निष्पादन किया गया और 5,893 मामले अभी भी प्रक्रिया में हैं. धनबाद (12,085 मामले) और गिरिडीह (11,918 मामले) भी उन जिलों में शामिल हैं जहां मुकदमों की तादाद बहुत अधिक है.

धनबाद और पूर्वी सिंहभूम का हाल 

धनबाद में 12,085 मामलों में से 9,054 का निपटारा हुआ है, जिससे इसकी पेंडेंसी 25.08% (3,031 मामले) बनी हुई है. पूर्वी सिंहभूम जिले का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से बेहतर है. पूर्वी सिंहभूम में कुल 8,585 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 6,776 (78.93%) का निष्पादन किया जा चुका है और वहां 1,809 मामले लंबित हैं. बोकारो जिले ने काफी सराहनीय काम किया है. बोकारो में कुल 8,317 मामलों में से 7,281 का निपटारा किया गया है. यहां का निष्पादन प्रतिशत 87.54% है, जो राज्य के औसत से कहीं बेहतर है और यहां केवल 12.46% मामले ही लंबित बचे है. देश का अग्रणी राज्य बन सकता है. फिलहाल, जमीनी विवादों से जूझ रहे आम लोगों को राहत देने के लिए इन 55 हजार से अधिक लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

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