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NDA का ‘मिशन रेडिसन ब्लू, जब तक काउंटिंग, तब तक होटल में ही हूटिंग, 18 जून तक ‘नजरबंद’ माननीय, नजर हटी, दुर्घटना घटी

Prerna Ranchi : झारखंड की सियासत में इन दिनों मौसम का मिजाज बदले न बदले, लेकिन नेताओं का मिजाज और ठिकाना हर...

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Ranchi : झारखंड की सियासत में इन दिनों मौसम का मिजाज बदले न बदले, लेकिन नेताओं का मिजाज और ठिकाना हर घंटे बदल रहा है. सूबे की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली जंग अब सिर्फ वोटों का गणित नहीं रही, बल्कि ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ और ‘विधायक बचाओ आंदोलन’ का दिलचस्प कॉकटेल बन चुकी है. आलम यह है कि नेताओं को जनता की फिक्र हो न हो, अपनी ही पार्टी के विधायकों पर तीसरी आंख रखनी पड़ रही है. डर इस बात का नहीं है कि जनता रूठ जाएगी. डर इस बात का है कि कहीं अपना ही कोई माननीय ‘क्रॉस वोटिंग’ की पिच पर चौका न मार दे.

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एनडीए का ‘होटल ब्लू’ प्लान: 18 जून तक ‘नजरबंद’ माननीय

एनडीए फोल्डर ने इस बार ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ की नीति को पूरी गंभीरता से लिया है. मंगलवार को अचानक हवा का रुख बदला और एनडीए के तमाम माननीय विधायक अपना-अपना सूटकेस उठाकर राजधानी के आलीशान होटल ‘रेडिसन ब्लू’ पहुंच गए. सूत्रों की मानें तो यह कोई वेकेशन या हॉलिडे मनाने की प्लानिंग नहीं है, बल्कि यह 18 जून (यानी काउंटिंग के दिन) तक की मुकम्मल ‘किलेबंदी’ है. जब तक वोट पेटी में बंद नहीं हो जाते और नतीजे आ नहीं जाते, तब तक विधायकों को बाहरी दुनिया की हवा से दूर, इसी लग्जरी होटल के वातानुकूलित कमरों में रखा जाएगा. यानी नो आउटसाइडर, नो टेंशन.

गठबंधन की ‘पाठशाला’: मॉक पोल और लंच डिप्लोमेसी

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ गठबंधन (झामुमो-कांग्रेस) भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है. कांग्रेस विधायक दल की बैठकें तो चल ही रही हैं, लेकिन असली मास्टरक्लास मुख्यमंत्री आवास में लगने जा रही है. 16 और 17 जून को गठबंधन के तमाम विधायकों को सीएम आवास बुलाया गया है. यहां विधायकों को चुनावी प्रक्रिया की बारीकियां समझाई जाएंगी. कहीं कोई माननीय गलती से गलत जगह टिक न मार दे. इसके लिए बाकायदा ‘मॉक पोल’ (डमी वोटिंग) कराया जाएगा. उद्देश्य साफ है, वोटिंग के दिन पेन की स्याही से लेकर दिमाग की सोच तक, सब कुछ लाइन पर रहना चाहिए.

जब अपनों पर ही आए ‘अपनों’ को शक

इस पूरी उठा पटक का सबसे मजेदार पहलू यह है कि चाहे एनडीए हो या यूपीए गठबंधन, दोनों ही खेमों को विपक्ष से ज्यादा डर भितरघात का सता रहा है. हर दल इस बात की टोह ले रहा है कि कहीं कोई विधायक चुपके से पाला बदलने की फिराक में तो नहीं है. मॉक पोल और होटल पॉलिटिक्स के इस तड़के ने झारखंड के राज्यसभा चुनाव को किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसा बना दिया है. जिसका क्लाइमेक्स 18 जून को ही खुलेगा. तब तक के लिए जनता टीवी स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठी है और नेताजी होटल के कमरों में चाय की चुस्कियों के साथ अपनी उंगलियों को ‘वोटिंग’ के लिए तैयार कर रहे हैं.

 

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