Report: Dheeraj Kumar

Ranchi: माओवाद के खिलाफ झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. राज्य के इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसर्पण होने वाला है. इसको लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय में तैयारी शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि 21 मई को 25 नक्सली आत्मसर्पण करने वाले हैं. इस मेगा सरेंडर कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के दर्जनों शीर्ष कमांडर और दस्ते के सदस्य एक साथ मुख्यधारा में शामिल होंगे. केंद्रीय गृह मंत्रालय और झारखंड सरकार की संयुक्त नीतियों के कारण नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है.
आत्मसर्पण करने वालों में दुर्दांत नक्सली रामदेव उरांव और उसकी पूरी टीम शामिल
आत्मसर्पण करने वाले दुर्दांत नक्सली रामदेव उरांव और उसकी पूरी टीम शामिल है. एक समय में रामदेव उरांव ने गुमला जिले में बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया था. इसके अलावा प्रभात कुमार उर्फ मुखिया ने खूंटी जिले में कई घटनाओं को अंजाम दिया था. एक अन्य नक्सली का नाम सचिन बताया जा रहा है जो गुमला जिले का है.
एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा भी झारखंड पुलिस और जांच एजेंसी के संपर्क में
एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा भी झारखंड पुलिस और जांच एजेंसी के संपर्क में है. झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सल गतिविधियों को ध्वस्त कर दिया है. पुलिस की बढ़ती दबिश ने नक्सलियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके कारण मुख्य धारा में नक्सली लौटने को मजबूर हो गए हैं. बताया जा रहा है कि मिसिर बेसरा की तबियत लगातार खराब होते जा रही है, इसलिए उसको आवागमन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हाल के दिनों में झारखंड पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त अभियान ने नक्सलियों के मनोबल को तोड़ दिया है, जिसके कारण नक्सली आत्मसर्पण करने के लिए मजबूर हो रहे हैं.
नई सरेंडर नीति का दिखा असर
झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति नई दिशा इस सामूहिक आत्मसमर्पण का मुख्य आधार बनी है. इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को न केवल आर्थिक सहायता दी जा रही है, बल्कि उनके परिवारों के पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की भी गारंटी मिल रही है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों को अब यह समझ आ गया है कि हिंसा के रास्ते से विकास संभव नहीं है. सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और अंदरूनी शोषण से तंग आकर नक्सलियों ने सामूहिक रूप से हथियार डालने का फैसला किया है.
सुरक्षा बलों का चौतरफा दबाव
पिछले कुछ समय में झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन ने बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ और कोल्हान जैसे दुर्गम नक्सली गढ़ों को पूरी तरह से मुक्त करा लिया है. नक्सलियों की सप्लाई लाइन और सुरक्षित ठिकाने खत्म हो गए हैं. इस चौतरफा घेराबंदी और लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के कारण नक्सलियों के पास दो ही विकल्प बचे थे या तो वे मुठभेड़ में मारे जाएं या आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें.
