News Wave Exclusive: झारखंड के सांसदों का अटेंडेंस सरेंडर: चुनाव में जोड़े हाथ, संसद में कई हुए गाय़ब, देखें सातों सत्रों की पूरी कुंडली

Ranchi: झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता जिन चेहरों को अपनी तकदीर संवारने और सूबे की तस्वीर बदलने के लिए देश की...

Ranchi: झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता जिन चेहरों को अपनी तकदीर संवारने और सूबे की तस्वीर बदलने के लिए देश की सबसे बड़ी पंचायत ‘लोकसभा’ भेजती है, वे माननीय वहां जाकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं या मौन व्रत पर हैं? 18वीं लोकसभा के अब तक के सातों सत्रों (सत्र 1 से सत्र 7) के आधिकारिक अटेंडेंस रजिस्टर से जो आंकड़े छनकर बाहर आए हैं, वे लोकतंत्र के इस मंदिर में जनता की उम्मीदों पर किसी तीखे प्रहार से कम नहीं हैं. एक तरफ जहां कुछ सांसदों ने रिकॉर्डतोड़ मौजूदगी दर्ज कराकर जनता के भरोसे का मान रखा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लापता सितारे भी हैं जिनकी हाजिरी का खाता बेहद कमजोर नजर आ रही है. संसद का एक-एक मिनट देश के खजाने और टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई से चलता है, लेकिन माननीयों की कुर्सियों पर पसरा सन्नाटा झारखंड के विस्थापन, बेरोजगारी और पलायन जैसे गंभीर मुद्दों का मखौल उड़ाता दिख रहा है.

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केंद्रीय मंत्री पद की संवैधानिक मजबूरी

आंकड़ों का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू कोडरमा से सांसद अन्नपूर्णा देवी और रांची के सांसद संजय सेठ का है. 18वीं लोकसभा के पहले सत्र से लेकर सातवें सत्र तक, इन दोनों दिग्गजों ने हाजिरी रजिस्टर में एक भी दिन हस्ताक्षर नहीं किया. सातों सत्रों में इनकी उपस्थिति का आंकड़ा 0 (शून्य) रहा. तकनीकी और संवैधानिक रूप से, जो सांसद केंद्र सरकार में मंत्री (कैबिनेट या राज्य मंत्री) का पद संभालते हैं, वे नियमित तौर पर सदन के दैनिक उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं करते हैं. उनकी उपस्थिति कार्यपालिका के रूप में स्वतः ही दर्ज मानी जाती है. अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ दोनों ही मोदी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इसलिए रजिस्टर में उनका साइन ‘शून्य’ दिख रहा है.

सत्र एकः शुरुआती जोश और शत-प्रतिशत हाजिरी

18वीं लोकसभा के इस पहले उद्घाटन सत्र में सांसदों के भीतर नया-नया जोश साफ दिखाई दिया. गोड्डा के डॉ. निशिकांत दुबे, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो, पलामू के विष्णु दयाल राम, धनबाद के ढुलू महतो, चतरा के काली चरण सिंह और हजारीबाग के मनीष जायसवाल ने 7 में से पूरे 7 दिन उपस्थित रहकर शत-प्रतिशत रिकॉर्ड बनाया. वहीं गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी, राजमहल के विजय कुमार हांसदा, दुमका के नलिन सोरेन, सिंहभूम की जोबा माझी और खूंटी के काली चरण मुंडा ने भी 7-7 दिन हाजिरी लगाई. लोहरदगा के सुखदेव भगत इस सत्र में महज 6 दिन उपस्थित रहे.

सत्र दोः निरंतरता की जंग

दूसरे सत्र में भी झारखंड के सांसदों का प्रदर्शन मजबूत रहा. गोड्डा के निशिकांत दुबे, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो, पलामू के विष्णु दयाल राम और हज़ारीबाग के मनीष जायसवाल ने 15 में से पूरे 15 दिन सदन में बिताए. वहीं खूंटी के काली चरण मुंडा ने भी 15 दिन की पूरी उपस्थिति दर्ज की. चतरा के काली चरण सिंह, राजमहल के विजय कुमार हांसदा, दुमका के नलिन सोरेन, सिंहभूम की जोबा माझी और लोहरदगा के सुखदेव भगत 14-14 दिन रजिस्टर में साइन करने में कामयाब रहे. गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी इस सत्र में थोड़े पिछड़ते हुए 10 दिन ही उपस्थित रह पाए, जबकि धनबाद के ढुलू महतो का ग्राफ गिरकर 9 दिन पर आ गया.

सत्र तीनः लंबा सत्र और कड़ा इम्तिहान

तीसरे सत्र के आते-आते कुछ सांसदों की थकावट या व्यस्तता साफ उजागर होने लगी. गोड्डा के निशिकांत दुबे, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो, पलामू के विष्णु दयाल राम, हजारीबाग के मनीष जायसवाल और लोहरदगा के सुखदेव भगत ने 20 में से पूरे 20 दिन उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई. धनबाद के ढुलू महतो और चतरा के काली चरण सिंह ने 18-18 दिन उपस्थिति दर्ज कराई. गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी और खूंटी के काली चरण मुंडा 17-17 दिन सदन पहुंचे. राजमहल के विजय कुमार हांसदा ने 14 दिन और सिंहभूम की जोबा माझी ने 11 दिन हाजिरी लगाई. इस सत्र में सबसे बड़ा झटका दुमका के सांसद नलिन सोरेन के रूप में लगा, जो कुल 20 दिनों में से सिर्फ 3 दिन ही सदन पहुंचे, यानी वे 17 दिन अनुपस्थित रहे.

सत्र चारः निष्ठा और जिम्मेदारी का शानदार प्रदर्शन

चौथे सत्र में सांसदों ने दोबारा अपनी उपस्थिति में सुधार किया. गोड्डा के निशिकांत दुबे और जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो ने 26 में से पूरे 26 दिन उपस्थित रहकर इतिहास रचा. लोहरदगा के सुखदेव भगत ने शानदार 25 दिन, पलामू के विष्णु दयाल राम और हज़ारीबाग के मनीष जायसवाल ने 24-24 दिन हाजिरी लगाई. गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी 23 दिन, चतरा के काली चरण सिंह 22 दिन, धनबाद के ढुलू महतो और राजमहल के विजय कुमार हांसदा 21-21 दिन सदन की कार्यवाही का हिस्सा बने. सिंहभूम की जोबा माझी ने 20 दिन और खूंटी के काली चरण मुंडा ने 16 दिन उपस्थिति दर्ज कराई. दुमका के नलिन सोरेन का ग्राफ थोड़ा सुधरा और वे 12 दिन उपस्थित रहे, हालांकि वे फिर भी 14 दिन गायब रहे.

सत्र पांचः सदन में डटे रहे झारखंड के माननीय

पांचवें सत्र में झारखंड के अधिकांश सांसदों की हाजिरी कड़क रही. गोड्डा के निशिकांत दुबे, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो और पलामू के विष्णु दयाल राम ने इस सत्र के सभी 21 दिनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. धनबाद के ढुलू महतो, चतरा के काली चरण सिंह, हजारीबाग के मनीष जायसवाल और गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी ने 20-20 दिन उपस्थिति दर्ज की. राजमहल के विजय कुमार हांसदा और लोहरदगा के सुखदेव भगत 19-19 दिन सदन में रहे. खूंटी के काली चरण मुंडा ने 18 दिन और सिंहभूम की जोबा माझी ने 15 दिन हाजिरी बही में हस्ताक्षर किए. दुमका के नलिन सोरेन का खराब प्रदर्शन जारी रहा और वे इस सत्र में भी सिर्फ 6 दिन ही आए, जबकि 15 दिन अनुपस्थित रहे.

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सत्र छहः हाजिरी के ग्राफ में आई अचानक गिरावट

छठे सत्र में सांसदों की उपस्थिति के दिनों में कमी देखी गई क्योंकि यह सत्र ही छोटा था. इस सत्र में अधिकतम संभव उपस्थिति 15 दिनों की थी. गोड्डा के निशिकांत दुबे, पलामू के विष्णु दयाल राम, धनबाद के ढुलू महतो, चतरा के काली चरण सिंह और गिरिडीह के चंद्र प्रकाश चौधरी ने 15 में से पूरे 15 दिन उपस्थित रहकर अपना रिकॉर्ड कायम रखा. जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो और राजमहल के विजय कुमार हांसदा ने 14-14 दिन हाजिरी लगाई. हजारीबाग के मनीष जायसवाल 13 दिन और लोहरदगा के सुखदेव भगत 11 दिन सदन में दिखे. दुमका के नलिन सोरेन एक बार फिर फ्लॉप साबित हुए और महज 6 दिन ही पहुंचे यानी 9 दिन गायब रहे. सिंहभूम की जोबा माझी ने भी इस सत्र में 14 दिन की उपस्थिति दर्ज कराई.

सत्र सातः निशिकांत, विद्युत और बीडी राम की हैट्रिक

हाल ही में संपन्न हुए सातवें सत्र में (जिसके उपलब्ध आंकड़ों में कुल 31 कार्यदिवसों का ब्योरा है), गोड्डा के जुझारू सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, जमशेदपुर के विद्युत वरण महतो और पलामू के विष्णु दयाल राम ने अपनी निष्ठा का परिचय देते हुए 31 में से पूरे 31 दिन संसद की कार्यवाही में भाग लिया. इन तीनों सांसदों ने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली.

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