News Wave Exclusive : राजभवन से लेकर CS ऑफिस तक के 26,000 से अधिक सरकारी कर्मियों का सर्विस बुक अधर में, लटक सकता है प्रमोशन
Ranchi : राज्य के कुल 1,80,548 पेरोल कर्मचारियों में से केवल 1,54,281 कर्मियों का डेटा अंतिम रूप से सेल्फ-वेरिफाइड हो पाया है....
Ranchi : राज्य के कुल 1,80,548 पेरोल कर्मचारियों में से केवल 1,54,281 कर्मियों का डेटा अंतिम रूप से सेल्फ-वेरिफाइड हो पाया है. 26,267 सरकारी कर्मचारियों की सर्विस बुक की डिजिटल डेटा प्रविष्टि अब तक अधूरी है. राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्य सचिव कार्यालय तक में कार्यरत कर्मचारियों की डेटा एंट्री नहीं हो पाई है.
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (गृह एवं कारा प्रभाग) : इस विभाग में पेरोल (ट्रेजरी सिस्टम) के अनुसार कुल 69,652 कर्मचारी कार्यरत हैं. कुल रजिस्ट्रेशन के बाद भी फॉर्म-1 के स्तर पर केवल 69,515 और अंतिम चरण यानी सेल्फ वेरिफाइड स्टेटस तक केवल 63,730 कर्मियों का ही डेटा पहुंच पाया है. विभाग के 5,922 कर्मचारियों के सर्विस बुक की अंतिम डेटा एंट्री अब तक पूरी नहीं हो सकी है.
राजभवन सचिवालय : राज्यपाल सचिवालय में स्वीकृत पदों की संख्या 183 है. जिसमें से केवल 14 पद भरे दिखाए गए हैं. कुल 57 कर्मियों का रजिस्ट्रेशन हुआ. लेकिन अंतिम रूप से केवल 56 कर्मियों का डेटा ही सेल्फ वेरिफाइड हो पाया है.
मुख्यमंत्री सचिवालय : सीएम सचिवालय में 120 स्वीकृत पद हैं. जिनमें से 42 भरे हुए हैं. यहां केवल 5 कर्मचारियों की ही डेटा एंट्री हो सकी है.
मुख्य सचिव कार्यालय : राज्य प्रशासनिक सेवा के सबसे बड़े अधिकारी के दफ्तर में कुल 32 स्वीकृत पद हैं. यहां मात्र 3 कर्मचारियों का डेटा ही सिस्टम में दर्ज हो पाया है.
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग : इस विभाग में ट्रेजरी सिस्टम के अनुसार 44,671 शिक्षक और कर्मचारी तैनात हैं. हालांकि विभाग में कुल रजिस्ट्रेशन 54,887 दिख रहा है. लेकिन फॉर्म-1 की एंट्री 52,913 पर और अंतिम रूप से सेल्फ वेरिफाइड डेटा केवल 49,058 कर्मियों का ही हुआ है. कुल रजिस्ट्रेशन और फॉर्म-1 की एंट्री के बीच का अंतर और अंतिम सत्यापन न होने के कारण 5,829 कर्मियों का डेटा अभी भी अधर में लटका हुआ है.
स्वास्थय, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग : इस विभाग में कुल 11,015 कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें से अब तक केवल 8,034 कर्मियों का फॉर्म-1 भरा गया है और अंतिम रूप से केवल 7,534 कर्मियों का डेटा ही सेल्फ वेरिफाइड हो सका है. यानी स्वास्थय विभाग के 3,481 कर्मचारियों की डेटा एंट्री का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है.
जल संसाधन विभाग : विभाग में कुल 7,642 कर्मचारी पेरोल पर हैं. इनमें से फॉर्म-1 के स्तर पर 4,304 और अंतिम रूप से केवल 3,954 कर्मियों का डेटा सत्यापित हुआ है. यानी इस विभाग के 3,688 कर्मचारियों की सर्विस बुक डिजिटल रिकॉर्ड से पूरी तरह बाहर है.
वन एवं पर्यावरण विभाग : पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले इस विभाग में कुल 3,465 कर्मचारी हैं. इनमें से फॉर्म-1 तक 3,051 और सेल्फ वेरिफाइड स्तर तक 2,834 कर्मी ही पहुंच पाए हैं. 631 कर्मियों की एंट्री अभी भी अधूरी है.
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (कृषि प्रभाग) : इस प्रभाग में कुल 2,870 कर्मचारी कार्यरत हैं. लेकिन अंतिम रूप से केवल 718 कर्मियों का डेटा ही सेल्फ वेरिफाइड हो पाया है. यानी 2,152 कृषि कर्मियों की सर्विस बुक एंट्री अधूरी है.
पशुपालन प्रभाग : यहां 2,517 कर्मचारी कार्यरत हैं. जिनमें से 1,560 का ही डेटा वेरिफाइड हुआ है. यानी 957 कर्मी अभी भी कतार में हैं.
सहकारिता प्रभाग : 888 कर्मचारियों में से 454 की ही अंतिम एंट्री हुई है. जबकि 434 कर्मियों का रिकॉर्ड पेंडिंग है.
श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग : युवाओं को रोजगार और कौशल देने वाले इस विभाग में 1,483 कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें से केवल 906 कर्मियों का डेटा ही अंतिम रूप से वेरिफाइड हुआ है. यानी 577 कर्मियों की एंट्री अधूरी है.
झारखंड लोक सेवा आयोग : राज्य के अधिकारियों की बहाली करने वाले जेपीएससी में 181 स्वीकृत पद हैं. जिनमें से 88 पदों पर कर्मी तैनात हैं. लेकिन यहां केवल 34 कर्मचारियों का डेटा ही सेल्फ वेरिफाइड हो पाया है. यानी 54 कर्मचारी अब भी डिजिटल रिकॉर्ड से वंचित हैं.
विधि विभाग : कानूनी मामलों को देखने वाले इस विभाग में पेरोल के अनुसार 4,165 कर्मचारी हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि यहां फॉर्म-1 के स्तर पर केवल 705 और अंतिम रूप से मात्र 12 (बारह) कर्मचारियों का डेटा ही सेल्फ वेरिफाइड हो पाया है. यानी विभाग के 4,153 कर्मचारियों की डेटा एंट्री का काम पूरी तरह से लटका हुआ है.
प्रमोशन में देरी : डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट न होने से समय पर डीपीसी की बैठकें नहीं हो पातीं और कर्मियों का प्रमोशन लटक जाता है.
रिटायरमेंट के बाद पेंशन में रुकावट : सेवा पुस्तिका का सत्यापन न होने से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रैच्युटी और अन्य फंड की निकासी में महीनों या सालों का चक्कर लगाना पड़ता है.
पारदर्शिता का अभाव : ऑनलाइन डेटा न होने से कर्मचारियों को अपनी सर्विस हिस्ट्री देखने और त्रुटियों को सुधारने का मौका नहीं मिलता.
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