Ravi Bharti
Ranchi: झारखंड और असम के बीच एक नई सियासी जंग छिड़ गई है, बदले की राजनीति बनाम तकनीकी मजबूरी. झारखंड विधानसभा चुनाव में हिमंता बिस्वा सरमा ने जिस तरह रांची की गलियों में पसीना बहाया था, उसी तरह हेमंत सोरेन उसी का ब्याज वसूलने असम की धरती पर उतरे. लेकिन, असम के आसमान में हेमंत और कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को जो नो फ्लाई जोन का सामना करना पड़ा. उसने पूर्वोत्तर की चुनावी गर्मी को हिमालयी ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. यह लड़ाई सिर्फ 18 सीटों की नहीं है, यह उस टीस की है जो पिछले साल झारखंड के चुनाव में पैदा हुई थी. बहरहाल, असम के चुनावी रण में अब तीर चल चुके हैं. आरोप कितने सच्चे हैं और तकनीकी कारण कितने वास्तविक, इसका फैसला तो चुनाव के नतीजे करेंगे. फिलहाल असम के आसमान में सियासी बादलों की गड़गड़ाहट झारखंड तक सुनाई दे रही है.
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हेलीकॉप्टर पॉलिटिक्स: संयोग या प्रयोग
झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए असम की 126 में से 18 सीटें जीतना शायद उतनी बड़ी प्राथमिकता नहीं है, जितनी भाजपा के विजय रथ को रोकना. जेएमएम का सीधा आरोप है कि हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को सोची-समझी रणनीति के तहत उड़ने से रोका जा रहा है. कल्पना सोरेन को तीन में से दो सभाएं छोड़नी पड़ीं क्योंकि उनके हेलीकॉप्टर को क्लीयरेंस नहीं मिला. खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी इसी तकनीकी बाधा का शिकार होना पड़ा.
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जब अमित शाह का विमान भी डगमगाया
दिलचस्प मोड़ तब आया जब असम सरकार ने इन आरोपों को मौसम और सुरक्षा के ढाल से ढक दिया. सरकार का तर्क है कि खराब मौसम और सुरक्षा प्रोटोकॉल किसी पार्टी का चेहरा देखकर नहीं तय होते. इसका सबसे बड़ा प्रमाण खुद गृह मंत्री अमित शाह बने. गोलकगंज में तकनीकी कारणों से शाह का हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका और उन्हें फोन पर ही जनता को संबोधित करना पड़ा. भाजपा इसे प्रकृति का खेल बता रही है, तो जेएमएम इसे सत्ता का खेल.
हिमंता की घेराबंदी
झारखंड चुनाव के दौरान असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सुबह-शाम एक कर झामुमो के खिलाफ मोर्चा खोला था. अब हेमंत सोरेन असम पहुंचकर उसी आक्रामकता का जवाब दे रहे हैं. राजनीतिक गलिय़ारों में चर्चा यह भी है कि जेएमएम इन आरोपों के जरिए असम के मार्जिनल वोटर्स के बीच यह संदेश देना चाहती है कि उनके नेताओं से सत्ता पक्ष डरा हुआ है. भले ही सीटें कम हों, लेकिन विक्टिम कार्ड और लड़ाकू तेवर के जरिए हेमंत सोरेन ने असम की जंग को निजी और दिलचस्प बना दिया है.
