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News Wave Special: रोजगार के साथ पर्यावरण भी, वन विभाग ने जारी की नई दर तालिका; 346 रुपए दिहाड़ी के साथ ग्रामीणों को मिलेगा सीधा काम, जंगलों में जेसीबी और मशीनों पर पूर्ण प्रतिबंध

Ranchi: वन विभाग ने एक बेहद महत्वाकांक्षी और ठोस खाका तैयार कर लिया है. झारखंड के पर्यावरण को बदलने, स्थानीय ग्रामीणों को...

Ranchi: वन विभाग ने एक बेहद महत्वाकांक्षी और ठोस खाका तैयार कर लिया है. झारखंड के पर्यावरण को बदलने, स्थानीय ग्रामीणों को सीधे रोजगार से जोड़ने और जलवायु परिवर्तन के दौर में राज्य को ग्रीन कव’ प्रदान करने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है. नए वित्तीय नियमों के तहत अब राज्य में अवकृष्ट (कमजोर) वनों के पुनर्वास से लेकर, हाईटेक पौधशालाओं के निर्माण, नदी तटों पर वृक्षारोपण और निजी जमीनों पर ‘मुख्यमंत्री जन वन योजना’ को नए सिरे से पंख दिए जाएंगे.

मशीनरी पर पूर्ण प्रतिबंध, ग्रामीणों को प्राथमिकता

इस नई दर तालिका में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि ट्रेंच (खाई) खुदाई या मिट्टी के कार्यों में किसी भी परिस्थिति में मशीनों (जैसे जेसीबी ) का प्रयोग नहीं किया जाएगा (विशेष परिस्थितियों में वन संरक्षक की अनुमति को छोड़कर). सुरक्षा और वृक्षारोपण के कार्यों में केवल और केवल वन से सटे गांवों के स्थानीय मजदूरों को ही नियोजित किया जाएगा. साथ ही, झाड़ी सफाई के दौरान फलदार और औषधीय महत्व के मौजूदा वृक्षों को काटने पर पूरी तरह रोक रहेगी.

मजदूरी की दर 346.01 रुपये प्रति मानव दिवस

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें मजदूरी की दर 346.01 रुपये प्रति मानव दिवस तय की गई है, जिससे सीधे तौर पर सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासियों और स्थानीय मजदूरों की जेब में सीधे पैसा पहुंचेगा और पलायन पर रोक लगेगी.

1,000 पौधों से सजेगा प्रति हेक्टेयर जंगल

राज्य के जिन हिस्सों में जंगल कमजोर या विरल हो चुके हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए अवकृष्ट वनों का पुनर्वास योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. इसके तहत प्रति हेक्टेयर 1,000 पौधे लगाए जाएंगे 7 वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर कुल 16,00,439.74 रुपये (लगभग 16 लाख रुपये) खर्च किए जाएंगे. शुरुआती अग्रिम कार्य (प्रथम वर्ष)  के लिए प्रति हेक्टेयर 1,15,994.72 रुपये का बजट है. इसमें सर्वेक्षण, सीमांकन और सबसे महत्वपूर्ण ट्रेंच घेरान (खाई निर्माण) शामिल है ताकि मवेशियों से पौधों की रक्षा हो सके.

पौधों की सुरक्षा पर महानिवेश

दूसरे वर्ष से लेकर सातवें वर्ष तक पौधों की कड़ाई से सुरक्षा की जाएगी. 25 हेक्टेयर तक के ब्लॉक के लिए हर साल 1,26,293.65 रुपये सिर्फ सुरक्षा और स्थानीय वॉचर्स पर खर्च होंगे.1,666 पौधों का सघन कवचपहाड़ी ढलानों और मिट्टी के कटाव से जूझ रहे वन क्षेत्रों के लिए सरकार भू-संरक्षण एवं वनरोपण योजना लेकर आई है. इसके अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 1,666 पौधे रोपे जाएंगे, जो राज्य के ग्राउंड वाटर (भूजल) को रिचार्ज करने में गेम-चेंजर साबित होंगे.

कैंपा और ग्रीन क्रेडिट

झारखंड में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जो वन भूमि अपयोजित (डाइवर्ट) की जाती है, उसकी भरपाई के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं.  अपयोजित वन भूमि के बदले नए क्षेत्रों में 1,100 पौधे प्रति हेक्टेयर की दर से पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना का नया नियम लागू किया गया है.इसका पूरा खर्च संबंधित प्रोजेक्ट एजेंसी (माइनिंग या इंडस्ट्रियल कंपनियां) उठाएगी. इसके साथ ही ‘ग्रीन क्रेडिट’ सिस्टम के जरिए राज्य के वनों की सेहत को सुधारा जाएगा.

हाईटेक और स्थायी पौधशालाएं

वृक्षारोपण अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पौधों की गुणवत्ता कैसी है. इसके लिए सरकार ने ‘स्थायी एवं आधुनिक हाईटेक पौधशाला का पूरा बजट ढांचा तैयार किया है: बड़े पैमाने पर वनीकरण के लिए 3-वर्षीय योजना के तहत विशाल पौधशालाएं बनेंगी. ब्लॉक स्तर पर 1 लाख और 50,000 पौधों की क्षमता वाली नर्सरी बनाई जाएंगी.अब कमजोर और छोटे पौधों की जगह ‘अतिरिक्त लंबे पौधे’ उगाने पर विशेष जोर है, ताकि उनके जीवित रहने की दर  90% से अधिक हो.

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मुख्यमंत्री जन वन योजना

किसानों की निजी और बेकार पड़ी भूमि पर हरियाली लाने और उनकी आय दोगुनी करने के लिए “मुख्यमंत्री जन वन योजना” के तहत आकर्षक सब्सिडी और सहायता दरों को मंजूरी दी गई है.निजी भूमि पर प्रति एकड़ 160 पौधे (आम, अमरूद, काजू आदि) लगाने के लिए सरकारी सहायता दी जाएगी. प्रति एकड़ 445 पौधे (सागवान, गम्हार आदि) लगाने का प्रावधान है, जो भविष्य में किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करेंगे.

सूखी नदियों और नालों को मिलेगा जीवन

झारखंड जलछाजन योजना के तहत जंगलों के भीतर पानी रोकने के लिए इंजीनियरिंग तकनीकों का सहारा लिया जाएगा, जिसके संशोधित कार्य दर जारी किए गए हैं. डीप कंटूर ट्रेंच  और वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण किया जाएगा. जंगलों के बीच छोटे डोभा और ‘न्यू पॉन्ड’ बनाए जाएंगे ताकि जंगली जानवरों को पीने का पानी मिले और जंगलों की आग पर काबू पाया जा सके.नालों पर ‘अर्थन चेक डैम’ और नाला बंडिंग की जाएगी.

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