न्यूज वेव खास : झारखंड की ब्यूरोक्रेसी अब ‘यंग, डायनेमिक और रिजल्ट ओरिएंटेड’ मोड में, 46 फीसदी आइएएस हैं युवा

Ravi Bharti Ranchi: झारखंड की नौकरशाही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कभी अनुभवी चेहरों के इर्द-गिर्द घूमने वाला...

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Ranchi: झारखंड की नौकरशाही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कभी अनुभवी चेहरों के इर्द-गिर्द घूमने वाला शासन अब तकनीकी रूप से दक्ष और ऊर्जा से लबरेज युवा अधिकारियों की ओर झुक गया है. राज्य में तैनात आईएएस अधिकारियों में एक बड़ी हिस्सेदारी 25 से 40 वर्ष के बीच के अधिकारियों की है. जहां 25 से 30 आयु वर्ग के अधिकारी ‘लर्निंग फेज’ में अपनी ऊर्जा झोंक रहे हैं, वहीं 30 से 40 आयु वर्ग के अधिकारी अपने अनुभव और जोश के मेल से राज्य की नीतियों को जमीन पर उतार रहे हैं. कुल मिलाकर, झारखंड की ब्यूरोक्रेसी अब ‘यंग, डायनेमिक और रिजल्ट ओरिएंटेड’ मोड में आ चुकी है. झारखंड कैडर के कुल 189 अधिकारियों में से 88 अधिकारी (लगभग 46%) 40 वर्ष से कम आयु के हैं. वर्तमान में झारखंड का प्रशासन देश के सबसे ‘युवा’ प्रशासनों में से एक है.

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25 से 30 वर्ष के युवा तुर्क

झारखंड कैडर में अधिकारियों की उम्र का गणित बताता है कि प्रशासन अब ‘रिटायरमेंट’ की उम्र की ओर नहीं, बल्कि ‘इनोवेशन’ की उम्र की ओर देख रहा है. इस आयु वर्ग में वे अधिकारी शामिल हैं जो हाल के वर्षों (2021-2024 बैच) में सेवा में आए हैं. वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में करीब 12 से 15 आईएएस अधिकारी 25 से 30 वर्ष के भीतर हैं. इनमें 2023 और 2024 बैच के अधिकारी जैसे अभिनव प्रकाश, अर्णव मिश्रा और सिद्धांत कुमार शामिल हैं, जो वर्तमान में एसडीएम और सहायक दंडाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इसके अलावा 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी विद्यांशु शेखर झा और पूर्वा अग्रवाल भी इसी युवा ब्रिगेड का हिस्सा हैं.

30 से 40 वर्ष के रणनीतिकार

यह वह वर्ग है जो वर्तमान में जिलों की कमान संभाल रहा है. 55 से 60 आईएएस अधिकारी 30 से 40 वर्ष की आयु के बीच हैं. 2014 से 2020 बैच के अधिकांश अधिकारी इसी श्रेणी में आते हैं. शशि रंजन, उत्कर्ष गुप्ता, और मनीष कुमार जैसे नाम इसी ऊर्जावान समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह वर्ग न केवल जिलों के डीसी के रूप में तैनात है, बल्कि राज्य मुख्यालय में निदेशक और संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काबिज है.

फील्ड पर युवा पकड़

झारखंड के 24 जिलों में से अधिकांश जिलों में 40 वर्ष से कम उम्र के उपायुक्त तैनात हैं. इसका सीधा मतलब है कि सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ‘फील्ड विजन’ और ‘त्वरित निर्णय’ क्षमता पर भरोसा कर रही है.

डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा

30 से 40 वर्ष के अधिकारी तकनीक के साथ पले-बढ़े हैं. यही कारण है कि झारखंड में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन म्यूटेशन और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स में तेजी आई है. ये अधिकारी डेटा-संचालित निर्णय लेने में अधिक सहज हैं.

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सामाजिक जुड़ाव

युवा अधिकारियों (25 से 30 वर्ष) की एसडीएम के रूप में तैनाती से जनता और प्रशासन के बीच की दूरी कम हुई है. सोशल मीडिया पर सक्रियता और सीधा संवाद इनकी पहचान बन गया है.

25 से 30 वर्ष के बीच के आइएएस

यह वर्ग झारखंड कैडर की सबसे युवा ब्रिगेड है, जिसमें मुख्य रूप से 2021 से 2024 बैच के अधिकारी और 2025 बैच के प्रशिक्षु शामिल हैं, इसमें 20 आईएएस अधिकारी हैं, जिसमें अभिनव प्रकाश, अर्णव मिश्रा, रिया सिंह और सिद्धांत कुमार, इसमें 2025 बैच के वे 8 अधिकारी भी शामिल हैं जो वर्तमान में मसूरी में प्रशिक्षण ले रहे हैं. इस आयु वर्ग की औसत आयु 26 से 28 वर्ष के बीच है.

30 से 40 वर्ष के बीच के आइएएस

यह झारखंड प्रशासन का सबसे सक्रिय और प्रभावशाली वर्ग है. राज्य के लगभग 70% जिलों की कमान इसी आयु वर्ग के पास है. 30-40 साल के अधिकारी नीति निर्धारण और जिला प्रशासन संभाल रहे हैं, वहीं 25-30 साल के अधिकारी अनुमंडल स्तर पर जनता की समस्याओं का त्वरित निष्पादन कर रहे हैं. 30 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में महिला आईएएस अधिकारियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

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