Lifestyle Desk: मुंह में नजर आने वाले बदलाव कई बार शरीर के भीतर चल रही पोषण संबंधी कमी का संकेत देते हैं. खासकर मैग्नीशियम की कमी होने पर ओरल हेल्थ पर भी असर दिख सकता है. यह जरूरी मिनरल मांसपेशियों की कार्यप्रणाली, हड्डियों और दांतों की मजबूती, नर्वस सिस्टम के संतुलन और शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारु रखने में अहम भूमिका निभाता है.
मैग्नीशियम की कमी को नजरअंदाज करना सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते संकेतों को समझा जाए. आइए जानते हैं मुंह में दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षण, जो इस कमी की ओर इशारा कर सकते हैं, साथ ही इससे बचाव के आसान उपाय भी-
ओरल हेल्थ दे रही चेतावनी: मैग्नीशियम की कमी के संकेत
मसूड़ों से खून आना
अगर दांत साफ करते समय या बिना किसी वजह के मसूड़ों से खून आने लगे, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज न करें. कई बार यह शरीर में जरूरी मिनरल मैग्नीशियम की कमी का संकेत हो सकता है, जो दांतों और मसूड़ों को कमजोर बना देता है.
दांतों का कमजोर होना
मैग्नीशियम शरीर में कैल्शियम के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे दांत मजबूत रहते हैं. इसकी कमी होने पर दांतों की पकड़ ढीली पड़ सकती है, उनमें दरार या कैविटी की समस्या बढ़ने लगती है.
मुंह में बार-बार छाले होना
यदि मुंह में बार-बार छाले निकल रहे हैं, तो यह सिर्फ सामान्य समस्या नहीं हो सकती. कई बार यह शरीर में जरूरी पोषक तत्वों, खासकर मैग्नीशियम की कमी और कमजोर इम्यून सिस्टम का संकेत होता है.
मुंह में सूखापन महसूस होना
अगर अक्सर मुंह सूखा-सूखा लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें. मैग्नीशियम की कमी नर्व और मांसपेशियों के कार्य को प्रभावित करती है, जिससे लार बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है और सूखापन बढ़ सकता है.
नींद में दांत किटकिटाना
अगर रात में सोते समय अनजाने में दांत किटकिटाने की आदत है, तो यह नर्वस सिस्टम में असंतुलन का संकेत हो सकता है. कई मामलों में यह मैग्नीशियम की कमी से भी जुड़ा पाया जाता है.
मुंह से बदबू आना
लगातार सांसों में बदबू महसूस होना सिर्फ ओरल हाइजीन की वजह से नहीं होता. लार का कम बनना और पाचन से जुड़ी गड़बड़ियां, जो मैग्नीशियम की कमी में देखने को मिलती हैं, इसकी वजह बन सकती हैं.
होठों का सूखना और फटना
अगर होंठ बार-बार सूखते, फटते या उनमें जलन रहती है, खासकर किनारों पर घाव बनते हैं, तो यह शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी का संकेत हो सकता है, जिसमें मैग्नीशियम भी शामिल है.
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कैसे करें मैग्नीशियम की कमी से बचाव
डाइट में पोषक चीजें शामिल करें
रोज़मर्रा के भोजन में पालक, मेथी, मूंगफली, कद्दू के बीज, तिल, अखरोट, बादाम, ओट्स, दालें और डार्क चॉकलेट जैसी चीजें शामिल करें. ये शरीर को जरूरी मैग्नीशियम देने में मदद करती हैं.
दूध और साबुत अनाज को दें जगह
दूध, दही, साबुत अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियां भी अच्छे स्रोत हैं, जो शरीर के मिनरल बैलेंस को बनाए रखने में सहायक होते हैं.
पर्याप्त पानी पीते रहें
शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. सही मात्रा में पानी पीने से पोषक तत्वों का संतुलन बेहतर बना रहता है.
जरूरत पड़े तो लें सप्लीमेंट
अगर लक्षण ज्यादा महसूस हों, तो खुद से दवा न लें। डॉक्टर की सलाह पर ही मैग्नीशियम सप्लीमेंट का उपयोग करें.
लाइफस्टाइल में करें बदलाव
तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें और जंक या प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर हेल्दी और संतुलित आहार अपनाएं.
नियमित जांच है जरूरी
समय-समय पर हेल्थ चेकअप और संतुलित खानपान अपनाकर मैग्नीशियम की कमी को आसानी से कंट्रोल कर सकते है.
DISCLAIMER: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है.इसे डॉक्टर की सलाह न समझें किसी भी समस्या में अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
