हजारीबाग में एक ही स्थान पर जमे अफसर, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल, ट्रेजरी घोटाले के बाद भी नहीं टूटी जड़ें, आखिर किसका संरक्षण?

हजारीबाग: जिले में हाल ही में सामने आए चर्चित ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए...

हजारीबाग: जिले में हाल ही में सामने आए चर्चित ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं. शंभू कुमार से जुड़े इस घोटाले के खुलासे और उनकी गिरफ्तारी के बाद जहां एक ओर कई परतें खुल रही हैं, वहीं दूसरी ओर एक चौंकाने वाली सच्चाई यह भी सामने आ रही है कि जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कई छोटे-बड़े अधिकारी 12 से 14 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं. सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का लंबे समय तक एक ही जगह पर पदस्थापन न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ है, बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देता है. इसके बावजूद हजारीबाग में कई ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी विभागीय बदली हो चुकी है, है, लेकिन वे अब भी पुराने स्थान पर जमे हुए हैं. सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में ये अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर वर्षों से एक ही जगह टिके हुए हैं? सूत्रों की मानें तो इन अधिकारियों की स्थानीय माफियाओं, विशेषकर कोयला और बालू तस्करी से जुड़े तत्वों से गहरी सांठगांठ बन चुकी है. यही कारण है कि वे हजारीबाग छोड़ने को तैयार नहीं हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों को खुश रखने के लिए स्थानीय स्तर पर हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं- चाहे वह घर तक ताजी सब्जियां पहुंचाना हो, पनीर, देसी घी की आपूर्ति हो या यहां तक कि पशुओं के लिए चारा और कुट्टी-दाना तक.

प्रशासनिक तंत्र और अवैध कारोबार के बीच एक मजबूत गठजोड़ विकसित हो चुका है:

यह नजदीकी संबंध केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश की बू भी आती है, जहां प्रशासनिक तंत्र और अवैध कारोबार के बीच एक मजबूत गठजोड़ विकसित हो चुका है. यही गठजोड़ व्यवस्था को खोखला कर रहा है और आम जनता के विश्वास को तोड़ रहा है. ट्रेजरी घोटाले में शंभू कुमार की गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर जमे रहने से किस तरह सरकारी धन की हेराफेरी संभव हो जाती है. यदि समय रहते इस पर निगरानी रखी जाती और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती, तो शायद इतना बड़ा घोटाला सामने नहीं आता. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेगा? क्या वर्षों से जमे अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता के बीच यह चर्चा पर है, कि यदि समय रहते ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण और जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में और भी बड़े घोटाले सामने आ सकते हैं. प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि वह अपनी कार्यशैली में सुधार लाए और जवाबदेही तय करे, अन्यथा व्यवस्था पर से जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है.

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