Hazaribagh : भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार से श्रमिकों की वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग करते हुए 17 अगस्त 2026 को देशभर के जिला मुख्यालयों, राज्य मुख्यालयों और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. BMS ने इस दिन को “मांग दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की है. संगठन का कहना है कि श्रमिकों, कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और योजना कर्मियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिन पर सरकार को तत्काल निर्णय लेना चाहिए. यह निर्णय भारतीय मजदूर संघ की 161वीं केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में लिया गया, जो 26 से 28 जुलाई 2026 तक रांची में आयोजित हुई. बैठक की अध्यक्षता BMS के अखिल भारतीय अध्यक्ष सुंकारी मल्लेशम ने की. बैठक में देशभर से आए 173 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 32 महिला प्रतिनिधि भी शामिल थीं.
17 अगस्त को होगा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन
बैठक में BMS की सभी इकाइयों को निर्देश दिया गया कि वे 17 अगस्त को जिला और राज्य स्तर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करें और जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपें. संगठन का उद्देश्य श्रमिकों की समस्याओं को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना और उनके समाधान के लिए दबाव बनाना है.
बीएमएस की प्रमुख मांगें
बैठक में श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया. BMS ने मांग की कि कर्मचारी पेंशन योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को वर्तमान ₹1,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹7,500 किया जाए. साथ ही इसमें महंगाई भत्ता जोड़ा जाए और पेंशनभोगियों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ भी दिया जाए. संगठन ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कर्मचारी भविष्य निधि और बोनस की वेतन सीमा को दोगुना करने की मांग की है. इसके अलावा ग्रेच्युटी की गणना 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन के वेतन के आधार पर करने और ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा समाप्त करने की भी मांग की गई है. BMS ने पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने, सभी प्रकार के योजना कर्मियों का मानदेय बढ़ाने और समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग उठाई है. संगठन का कहना है कि यह सिद्धांत ठेका श्रमिकों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए. इसके अतिरिक्त बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, सप्ताह में पांच कार्य दिवस लागू करने और श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा अधिकारों को मजबूत करने की मांग भी की गई है.
एचईसी और राष्ट्रीय टेक्सटाइल मिलों के कर्मचारियों के बकाया वेतन का मुद्दा भी उठा
BMS ने रांची स्थित HEC के कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. संगठन ने मांग की कि HEC सहित आठ राज्यों में स्थित 23 राष्ट्रीय टेक्सटाइल मिलों के कर्मचारियों के लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए.
श्रम संहिताओं में संशोधन की मांग
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताओं पर भी चर्चा हुई. BMS ने आरोप लगाया कि इनमें कुछ प्रावधान श्रमिक हितों के अनुकूल नहीं हैं. संगठन ने मांग की कि श्रमिक-विरोधी माने जा रहे प्रावधानों में संशोधन कर श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत किया जाए.
आईएलओ के निर्णय का किया स्वागत
बैठक में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा “प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में गरिमापूर्ण कार्य” संबंधी कन्वेंशन को त्रिपक्षीय सहमति से अपनाने का स्वागत किया गया. BMS ने इसे वैश्विक श्रम व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि इससे प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिकों के अधिकारों को मजबूती मिलेगी. संगठन ने निर्णय लिया कि इस विषय पर श्रमिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं और नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी.
ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम की हैदराबाद घोषणा का समर्थन
बैठक में ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम द्वारा सर्वसम्मति से पारित हैदराबाद घोषणा का भी स्वागत किया गया. BMS ने भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख विषयों पर अध्ययन और कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया. इनमें भविष्य के लिए कौशल, मानव-केंद्रित प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महिला और भविष्य का कार्य और सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं. BMS का कहना है कि इन विषयों पर विस्तृत अध्ययन कर ब्रिक्स+ देशों की सरकारों को सुझाव दिए जाएंगे, ताकि बदलते श्रम बाजार और तकनीकी परिवर्तनों के बीच श्रमिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
श्रमिक हितों के लिए निर्णायक आंदोलन की तैयारी
BMS के महासचिव सुरेन्द्र कुमार पांडेय द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि यदि श्रमिकों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो संगठन आगे भी व्यापक जनआंदोलन चलाने पर विचार करेगा. 17 अगस्त का प्रस्तावित प्रदर्शन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें देशभर के लाखों श्रमिकों और कर्मचारियों की भागीदारी की संभावना है.
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