Pakur : सिंहवाहिनी मंदिर में बिपत्तारिणी पूजा पूरी श्रद्धा, हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाई गई. आषाढ़ मास में रथ यात्रा के बाद पड़ने वाले मंगलवार या शनिवार को बिपत्तारिणी पूजा की जाती हैं. इस दौरान महिलाओं ने उपवास रखा और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए माता की विशेष पूजा की.
बिपत्तारिणी देवी मां का व्रत
पूजा में मां को 13 प्रकार के फल, फूल और मिठाइयों का भोग लगाया गया. इस दौरान व्रत में व्रती अपने दाहिने हाथ में 13 गांठों वाला लाल धागा बांधती हैं. जिसे माता का आशीर्वाद माना जाता हैं. सुबह से ही महिलाएं मंदिरों में जुटने लगीं और उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना कर परिवार की हर विपत्ति दूर करने की प्रार्थना की. बिपत्तारिणी देवी मां दुर्गा का ही एक रूप मना जाता है. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत रखने पर माता भक्तों के सारे संकट दूर कर देती है.
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