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अन्य को चेतावनी देकर छोड़ा गया, बाल कल्याण समिति ने पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की
Palamu: मेदिनीनगर शहर में लगे डिज्नीलैंड मेले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाया गया. बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण इकाई और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई मे सात बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया. संबंधित टीम ने अभियान के दौरान मेले में काम कर रहे अन्य बालकों की भी जांच की और उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराते हुए नियोजक को चेतावनी एवं दिशा-निर्देश देकर छोड़ दिया गया. मुक्त कराए गए बच्चों को संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है, ताकि उनके सामाजिक, शैक्षणिक और पारिवारिक स्थिति का आकलन किया जा सके. समिति की ओर से बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अभियान के दौरान मेले में संचालकों और दुकानदारों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम नहीं कराया जाए. अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को काम पर लगाने के बजाय उन्हें शिक्षा, संरक्षण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.

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14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है. बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनों के तहत बच्चों को रोजगार में लगाने पर नियोक्ता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है. अभियान का उद्देश्य बाल श्रम पर रोक लगाने के साथ-साथ प्रभावित बच्चों को संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की मुख्यधारा से जोड़ना है. पदाधिकारियो ने कहा कि बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और सार्वजनिक स्थानों, मेलों, दुकानों तथा अन्य प्रतिष्ठानों में बच्चों से श्रम कराए जाने की शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. रेस्कयू टीम मे बाल कल्याण समिति सदस्य रविशंकर, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी जिसान अहमद, पीओएनआईसी नासिर अली, श्रम विभाग से एलईओ सदर अनिल कुमार एवं एलईओ चैनपुर राहुल कुमार के साथ चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक अमित कुमार सुधांशु शुक्ला गौतम कुमार मनीष कुमार आदि शामिल थे.

