Ranchi: झारखंड में बस संचालकों द्वारा किराए में प्रस्तावित बढ़ोतरी का झारखंड यात्री संघ ने कड़ा विरोध किया है. संघ ने इसे पूरी तरह नाजायज, अनुचित और आम जनता के हितों के खिलाफ बताया है. इस मुद्दे पर संघ के अध्यक्ष प्रेम मित्तल की अध्यक्षता में एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें बस संचालकों के फैसले के खिलाफ सर्वसम्मति से आवाज उठाई गई.

किराया तय करने का अधिकार किसे?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यात्री वाहनों का किराया निर्धारित करने का अधिकार केवल सरकार और परिवहन विभाग को है. कोई भी बस संचालक अपनी मर्जी से किराया तय नहीं कर सकता. यदि बस संचालक स्वयं किराया बढ़ाने का फैसला करते हैं तो यह कानून के दायरे से बाहर और गैरकानूनी माना जाएगा.
5% डीजल वृद्धि पर 20% किराया क्यों?
यात्री संघ ने सवाल उठाया कि जब डीजल की कीमतों में केवल लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो बस किराए में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का औचित्य क्या है. संघ का कहना है कि झारखंड, विशेषकर रांची में पहले से ही बस और टेंपो का किराया देश के कई राज्यों की तुलना में अधिक है. ऐसे में किराया बढ़ाना सीधे तौर पर आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है.
चैंबर ऑफ कॉमर्स की भूमिका पर सवाल
बैठक में इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया गया कि चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा बस संचालकों के साथ बैठक कर किराया तय करने की चर्चा सामने आई है. संघ ने कहा कि किराया निर्धारण का अधिकार सरकार का है, चैंबर ऑफ कॉमर्स केवल सुझाव दे सकता है, निर्णय नहीं.
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
यात्री संघ के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार और परिवहन सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो लाखों यात्रियों का आर्थिक शोषण होगा. संघ ने सरकार से आम जनता के हितों की रक्षा करने और मनमाने किराया वृद्धि के प्रयासों पर रोक लगाने की मांग की है.
