झारखंड पुलिस एसोसिएशन का फैसला: नकद अंशदान पर लगी रोक, 6 महीने तक पैसा न भेजने वाली शाखाओं की मान्यता होगी रद्द

Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय ने संघ के वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण...

Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय ने संघ के वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. एसोसिएशन ने अपनी सभी शाखाओं द्वारा केंद्रीय कार्यालय में नकद राशि जमा करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इसके साथ ही लंबे समय से केंद्रीय अंशदान लंबित रखने वाली शाखाओं को चेतावनी जारी की गई है.

इस संबंध में झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय द्वारा एक आधिकारिक पत्र जारी कर सभी शाखाओं के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए हैं.

6 महीने तक अंशदान न देने पर छिनेगी मान्यता

जारी आधिकारिक पत्र में एसोसिएशन के संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई भी शाखा, इकाई या वाहिनी लगातार 6 महीने तक संघ के अंशदान की राशि केंद्रीय एसोसिएशन को नहीं भेजती है, तो नियमों के तहत उस शाखा की वैधता (मान्यता) समाप्त करने का प्रावधान है. वर्तमान में संघ की कई ऐसी शाखाएं हैं, जिनका केंद्रीय अंशदान काफी लंबे समय से बकाया है.

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7 दिनों के भीतर बैंक खाते में जमा करना होगा बकाया

केंद्रीय कार्यालय ने सभी डिफॉल्टर और अन्य शाखाओं को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि पत्र प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर अपने केंद्र का लंबित अंशदान झारखंड पुलिस एसोसिएशन के आधिकारिक बैंक खाते में अनिवार्य रूप से जमा कराएं. इसके लिए बैंक विवरण भी जारी किया गया है. शाखाओं को निर्देश दिया गया है कि बैंक में राशि जमा करने के तुरंत बाद वे केंद्रीय एसोसिएशन से संपर्क कर अपनी प्राप्ति रसीद अवश्य सुनिश्चित कर लें.

नकद राशि लाने पर पूर्ण रोक, खुद की होगी जिम्मेदारी

अक्सर देखा जा रहा था कि विभिन्न शाखाओं द्वारा केंद्रीय अंशदान की राशि नकद के रूप में रांची स्थित केंद्रीय कार्यालय लाई जाती थी. एसोसिएशन ने अब इस व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है. पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि किसी भी परिस्थिति में शाखाओं से नकद अंशदान स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद अगर कोई नकद राशि जमा करता है, तो उसे ‘निजी राशि’ माना जाएगा और किसी भी गड़बड़ी के लिए संबंधित पदाधिकारियों की स्वयं की जवाबदेही होगी.

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