Hazaribagh: सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को बेहतर इलाज और सम्मानजनक सुविधा देने के दावों के बीच हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट ने शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ट्रस्ट ने अस्पताल के ओल्ड सर्जिकल वार्ड में फैली गंदगी, जाम शौचालय, टूटे दरवाजे और महिला सुरक्षा की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी जताई है.

ट्रस्ट के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वार्ड के शौचालयों की स्थिति लंबे समय से बेहद खराब थी. शौच टंकी भर जाने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी. दुर्गंध और गंदगी के कारण वार्ड में रहना मुश्किल हो गया था. कई बार शिकायत करने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन और केयर टेकर द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई.
महिला शौचालय का टूटा दरवाजा बना चिंता का विषय
ट्रस्ट की ओर से आवाज उठाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में शौच टंकी की सफाई तो कराई, लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई. ट्रस्ट का कहना है कि चार दिन बीत जाने के बावजूद महिला शौचालय का टूटा दरवाजा अब तक ठीक नहीं कराया गया है. इससे महिला मरीजों और उनके परिजनों की निजता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले अधिकांश मरीज गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से होते हैं. ऐसे में उन्हें कम-से-कम साफ-सफाई और सुरक्षित शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए. लेकिन अस्पताल की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि गरीबों की गरिमा और महिलाओं की सुरक्षा की कोई कीमत नहीं रह गई है.
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72 घंटे में व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि 72 घंटे के भीतर शौचालय की मरम्मत, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो अस्पताल परिसर में आंदोलन किया जाएगा. ट्रस्ट ने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन केवल औपचारिकता निभाने में लगा है, जबकि वार्डों की वास्तविक स्थिति बेहद खराब है.
अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन चेतावनी के बाद व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीर कदम उठाता है या फिर गरीब मरीजों को इसी बदहाल व्यवस्था में इलाज कराने को मजबूर रहना होगा.
