Ranchi: झारखंड से राज्यसभा चुनाव के रण में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) से बड़ी राहत मिली है. उनके नामांकन पत्र के खिलाफ विरोधी खेमे द्वारा दर्ज कराई गई तमाम कानूनी अड़चनों और आपत्तियों को रिटर्निंग ऑफिसर ने सिरे से खारिज कर दिया है. 10 जून 2026 को जारी अपने विस्तृत आदेश में रिटर्निंग ऑफिसर ने परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को पूरी तरह वैध घोषित करते हुए उसे स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही अब नाथवानी के चुनावी मैदान में बने रहने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत पारित इस आदेश में विरोधियों द्वारा उठाए गए तकनीकी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई.

स्क्रूटनी में उठीं आपत्तियां और रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला
नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान 9 जून 2026 को परिमल नाथवानी के खिलाफ एक आपत्ति याचिका दायर की गई थी. इस पर दोनों पक्षों के वकीलों की तीखी बहस सुनने और दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने बिंदुवार फैसला सुनाया.
1. नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) का मामला
• आपत्ति: शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रत्याशी ने सरकारी आवास से संबंधित ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जमा नहीं किया है.
• फैसला: रिकॉर्ड की जांच करने पर पाया गया कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है. इसलिए यह आपत्ति निराधार है.
2. शेयरहोल्डिंग और वित्तीय हितों को छिपाने का आरोप
• आपत्ति: आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवार एक कंपनी में शेयरधारक/निदेशक हैं और उन्होंने इस वित्तीय हित को छुपाया है.
• फैसला: उम्मीदवार ने संबंधित कंपनी में शेयरधारक होने से साफ इनकार किया है. रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 26 में दी गई जानकारियों की सत्यता या पर्याप्तता की जांच करना स्क्रूटनी (धारा 36) के सीमित दायरे से बाहर है. चूंकि निर्धारित हलफनामा दाखिल किया जा चुका है, इसलिए इसे नामांकन रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता.
3. नाम के प्रारूप में अंतर
• आपत्ति: चुनावी रोल और नामांकन पत्र में उम्मीदवार के नाम के क्रम में भिन्नता होने का मुद्दा उठाया गया था.
• फैसला: उम्मीदवार ने प्रमाण पेश किए कि “परिमल नाथवानी” और “नाथवानी परिमल” एक ही व्यक्ति हैं. सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं. वह पहले भी झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं. नाम के आगे-पीछे होने का यह अंतर महज तकनीकी है, जिसे कानूनन गंभीर त्रुटि नहीं माना जा सकता.
4. फॉर्म 26 में खाली छोड़े गए कॉलम
• आपत्ति: विरोधियों का दावा था कि आश्रितों से जुड़े कुछ कॉलम खाली छोड़े गए थे, जिससे हलफनामा अधूरा था.
• फैसला: उम्मीदवार ने स्पष्ट किया कि जो कॉलम उन पर लागू नहीं होते थे, उन्हें खाली छोड़ा गया था. बाद में उन्होंने संशोधित फॉर्म 26 सौंपकर स्थिति साफ कर दी. सुप्रीम कोर्ट के ‘रिसर्जेंस इंडिया’ मामले का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया कि चूंकि मूल हलफनामा समय पर जमा था और उम्मीदवार ने मांगने पर स्पष्टीकरण दे दिया है, इसलिए इसके आधार पर नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता.
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अंतिम आदेश
रिटर्निंग ऑफिसर ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उम्मीदवार परिमल नाथवानी संविधान के अनुच्छेद 102 या जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं के तहत किसी भी प्रकार से अयोग्य नहीं हैं. धारा 36(4) के तहत किसी भी गैर-महत्वपूर्ण या तकनीकी कमी के आधार पर पर्चा खारिज नहीं किया जा सकता. अतः सभी आपत्तियों को निरस्त करते हुए नाथवानी का नामांकन पत्र वैध पाया जाता है और इसे सहर्ष स्वीकार किया जाता है.
