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गुमला: जल, जंगल और जमीन बचाने का आह्वान. वन्य प्राणी आश्रयणी के विरोध में ग्रामीणों की हुंकार

Gumla: जिले के पालकोट प्रखंड के कुलुकेरा पंचायत अंतर्गत सिजांग, कठरडाड़, उपरघाट, बिलिगंबिरा एवं सारुवेड़ा गांव के ग्रामीणों की बुधवार को सरना...

Gumla: जिले के पालकोट प्रखंड के कुलुकेरा पंचायत अंतर्गत सिजांग, कठरडाड़, उपरघाट, बिलिगंबिरा एवं सारुवेड़ा गांव के ग्रामीणों की बुधवार को सरना बगीचा में जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर एक विशाल बैठक आयोजित की गई. बैठक में क्षेत्र के हजारों महिला-पुरुष शामिल हुए और वन्य प्राणी आश्रयणी के मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की.

बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी प्रिया मुंडा उपस्थित रहीं. वहीं मंचासीन अतिथियों में भाजपा नेता अरविंद मिश्रा, भोला साहू एवं विजय मुंडा शामिल थे. बैठक में ग्राम प्रधान केश्वर पहचान, मुखिया धनेश्वर नगेसिया, पुजार गोविंद मुंडा, रीमा खड़िया, डुमेश्वर उरांव, एतवा उरांव, सुनीता देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.

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आश्रयणी के विरोध में उठी आवाज

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने पालकोट प्रखंड को वन्य प्राणी आश्रयणी घोषित किए जाने का विरोध जताया. वक्ताओं ने कहा कि आश्रयणी घोषित होने के बाद क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद किया तथा आगामी चुनावों में वोट बहिष्कार की चेतावनी दी.

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अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान

मुख्य अतिथि प्रिया मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी एवं ग्रामीण समाज की पहचान है. इसकी रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा. उन्होंने ग्रामीणों से ग्राम सभा को मजबूत बनाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया.

ग्राम सभा को मजबूत बनाने पर जोर

भाजपा नेता अरविंद मिश्रा ने कहा कि पालकोट को वन्य प्राणी आश्रयणी घोषित किए जाने के बाद विकास कार्यों की गति धीमी हो गई है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को अपने अधिकारों के लिए ग्राम सभा के माध्यम से आवाज उठानी चाहिए तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.

संघर्ष जारी रखने का संकल्प

बैठक में पंचायत समिति सदस्य मरियम डुंगडुंग, इस्माइल नगेसिया, महेश लोहरा, जोसेफ शांतितिक्री, चुन्नू सिंह, अजीत विश्वकर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए जल, जंगल और जमीन बचाव अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया. अंत में ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया.

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