Ranchi: झारखंड की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की जोरदार मांग की है. इस मांग के साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने की चुनौती दे दी है. भाजपा नेताओं ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल 2026 में लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में विपक्ष के सहयोग के अभाव में पारित नहीं किया जा सका, जिससे देशभर की महिलाओं को मिलने वाला बड़ा अवसर फिलहाल अधर में लटक गया. उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह बिल पास होता, तो 2029 से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में व्यापक प्रतिनिधित्व मिलता.
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झारखंड की लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ जाती : भाजपा
झारखंड के संदर्भ को खास तौर पर उछालते हुए भाजपा नेता ने कहा कि इस बिल के लागू होने से राज्य की लोकसभा सीटें 14 से बढ़कर 21 हो सकती थीं, जिनमें 7 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं. वहीं विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 सीटों पर महिलाओं को मौका मिलता. भाजपा ने इसे झारखंड की आधी आबादी के लिए “ऐतिहासिक न्याय” करार दिया है. भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए कहा कि झारखंड की धरती पर महिलाओं को हमेशा से सम्मान और भागीदारी मिली है, ऐसे में सरकार को इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पहल करनी चाहिए. नेताओं ने राज्यपाल की अनुमति लेकर विशेष सत्र बुलाने और इस बिल को पारित कर केंद्र से दोबारा इसे लागू कराने की सिफारिश करने की मांग रखी है.

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