Ranchi: झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024 लागू होने से पहले, मॉडल गाइडलाइन के तहत राज्य में विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए प्रस्तावकों ने आवेदन शुल्क के रूप में 1.00 लाख रुपये जमा किए थे. साथ ही लेटर ऑफ इंटेंट के अनुपालन प्रतिवेदन के रूप में 4.00 करोड़ रुपये बतौर इंडोमेंट फंड भी गिरवी रखे गए थे. सरकार ने अब यह निर्णय लिया है कि यह पूरी राशि संबंधित निजी विश्वविद्यालयों और ट्रस्ट को वापस कर दी जाएगी. इस फैसले से उन संस्थानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी जो पुरानी गाइडलाइन के तहत प्रक्रिया में शामिल थे.

महाधिवक्ता कार्यालय के विधि पदाधिकारियों के शुल्क में संशोधन
राज्य सरकार से जुड़े मुकदमों को मजबूती से लड़ने के लिए झारखंड उच्च न्यायालय, अन्य न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में पैरवी करने वाले विधि पदाधिकारियों के शुल्क में बदलाव किए गए हैं. महाधिवक्ता कार्यालय, रांची में नियुक्त महाधिवक्ता, वरीय अपर महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता और राजकीय अधिवक्ता के शुल्क निर्धारण और पुनरीक्षण में संशोधन की घटनोत्तर स्वीकृति दे दी गई है. इससे कानूनी मामलों में पैरवी करने वाले वकीलों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकेगा.
केंद्रीय कारागारों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक की स्थापना
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (सुहास चकमा बनाम भारत सरकार) मामले में 26 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के पालन में एक अहम कदम उठाया गया है. इसके तहत राज्य के प्रमुख कारागारों बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार, रांची), केंद्रीय कारा (दुमका), केंद्रीय कारा (घाघीडीह, जमशेदपुर) और लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंदीय कारा (हजारीबाग)में ओपन और सेमी-ओपन बैरक बनाने की मंजूरी दे दी गई है. इस पहल का उद्देश्य कैदियों के सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया को अधिक मानवीय बनाना है.
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जल संसाधन विभाग के लिए रिवाइज्ड स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट-2026 लागू
बुनियादी ढांचे के विकास में पारदर्शिता और गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग के तहत 2.50 करोड़ रुपये से अधिक लागत के कार्यों के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है. अब विभाग में ‘रिवाइज्ड स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2026’ लागू कर दिया गया है. इसके तहत पुराने एसबीडी के कई नियमों और कंडिकाओं में संशोधन, विलोपन और नए प्रावधानों को शामिल किया गया है, जिससे टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यों में अधिक स्पष्टता आएगी.
मांस और मांस उत्पादों के कारोबार के लिए नया म्यूनिसिपल रेगुलेशन
खाद्य सुरक्षा और व्यापार को विनियमित करने के लिए ‘झारखंड म्यूनिसिपल रेगुलेशन फॉर इश्यू ऑफ नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट फॉर फूड बिजनेस ऑपरेटर्स इंगेज्ड इन मैन्युफैक्चर, प्रोसेसिंग, स्टोरिंग एंड सेलिंग ऑफ मीट एंड मीट प्रोडक्ट्स, 2026’ को स्वीकृति मिल गई है. जो फूड बिजनेस ऑपरेटर मांस और मांस उत्पादों के निर्माण, प्रोसेसिंग, भंडारण और बिक्री के व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्हें अब इस नए रेगुलेशन के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा.

