रामायण सर्किट की तलाश में झारखंड पहुंचीं सोलो ट्रैवलर, हजारीबाग के स्थलों का होगा डॉक्यूमेंटेशन

HAZARIBAGH: प्रसिद्ध ट्रैवल ब्लॉगर डॉ. कायनात काजी ने हजारीबाग में प्रभु श्रीराम से जुड़े स्थलों के व्यवस्थित डॉक्यूमेंटेशन की आवश्यकता पर जोर...

HAZARIBAGH: प्रसिद्ध ट्रैवल ब्लॉगर डॉ. कायनात काजी ने हजारीबाग में प्रभु श्रीराम से जुड़े स्थलों के व्यवस्थित डॉक्यूमेंटेशन की आवश्यकता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को चिन्हित कर उन्हें व्यापक पहचान दिलाना जरूरी है.

डॉ. काजी भारत की प्रमुख सोलो महिला ट्रैवलर हैं, जो अब तक तीन लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुकी हैं. वह इन दिनों झारखंड पर्यटन विभाग के साथ जुड़कर राज्य में रामायण सर्किट से जुड़े स्थलों की खोज और दस्तावेजीकरण कर रही हैं. इसी क्रम में वह गुरुवार शाम हजारीबाग पहुंचीं.

कई जिलों का कर चुकी हैं भ्रमण

इससे पूर्व वह रांची, गुमला, सिमडेगा, सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो और देवघर जैसे जिलों का भ्रमण कर चुकी हैं. हजारीबाग में वह बरकट्ठा प्रखंड स्थित राम, सीता और लक्ष्मण कुंड का दर्शन करेंगी तथा वहां उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियों और तस्वीरों का संकलन करेंगी, जिससे झारखंड में रामायण सर्किट की कड़ी को मजबूत किया जा सके.

इसके अलावा वह राम वन गमन पथ और भगवान राम के वनवास से जुड़े अल्पज्ञात स्थलों की भी जानकारी एकत्र कर रही हैं.

हजारीबाग की विरासत से प्रभावित

डॉ. काजी हजारीबाग की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान को जानकर काफी प्रभावित हुईं. उन्होंने कहा कि यहां की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है.

बरकट्ठा स्थित सूर्यकुंड के समीप राम, सीता और लक्ष्मण कुंड के बारे में उन्हें स्थानीय पुरोहितों ने जानकारी दी. बताया गया कि तीनों कुंड पास-पास होने के बावजूद इनके जल का स्तर सूर्यकुंड की तुलना में कम है.

कुंडों के जल की विशेषता ने किया आकर्षित

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रामकुंड का जल काफी शीतल है, जबकि लक्ष्मण कुंड का जल उनके क्रोधी स्वभाव के अनुरूप अपेक्षाकृत गर्म रहता है. इन तथ्यों ने उन्हें आश्चर्यचकित किया.

दिल्ली में रहने के कारण झारखंड को लेकर उनकी जो धारणा थी, वह यहां आकर काफी हद तक बदली. उन्होंने कहा कि राज्य और विशेषकर हजारीबाग के लोग बेहद मिलनसार, मददगार और जागरूक हैं. झारखंड यात्रा के दौरान उन्हें कहीं किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई.

संस्कृति और पर्यटन स्थलों में भी दिखाई रुचि

हजारीबाग में संत कोलंबा कॉलेज, हजारीबाग झील, केंद्रीय कारा और कोहवर-सोहराय पेंटिंग की जानकारी पाकर वह काफी प्रभावित हुईं. इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए वह संस्कृति संग्रहालय के संस्थापक बुलू इमाम से भी मुलाकात करेंगी.

डॉ. कायनात काजी हिन्दी साहित्य में पीएचडी धारक हैं और उन्होंने दो पुस्तकें भी लिखी हैं. यात्रा साहित्य पर उनकी पुस्तक राहगिरी तथा कहानी संग्रह बोगनवेलिया प्रकाशित हो चुके हैं.

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