Hazaribagh: जिले में धान उठाव को लेकर गंभीर अनियमितताओं ने अब बड़ा रूप ले लिया है. इचाक प्रखंड समेत कई इलाकों के सैकड़ों किसानों ने पैक्स और एफपीओ पर सुनियोजित घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
छोटे किसानों की अनदेखी का आरोप
किसानों का कहना है कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपये की बंदरबांट की गई है, जिसमें छोटे और मध्यम किसानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. हस्ताक्षरयुक्त आवेदन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कृषि मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की, हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह और जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी मुरली यादव को भेजा गया है.
खरीद और उठाव नहीं होने से फसल सड़ने की नौबत
आवेदन में साफ आरोप है कि सरकारी खरीद की घोषणा के बावजूद हजारों किसानों का धान अब तक न तो खरीदा गया और न ही उठाव हुआ. नतीजा यह है कि किसानों की मेहनत खेतों और गोदामों में सड़ रही है, जबकि पैक्स और एफपीओ के संचालक कथित तौर पर मनमानी और दलाली में लगे हैं.
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100 करोड़ से ज्यादा गबन का आरोप
स्थानीय युवा नेता गौतम कुमार ने आरोप लगाया कि जिले में 100 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ है और बिना उच्चस्तरीय जांच के सच्चाई सामने नहीं आएगी. उन्होंने मांग की कि जिन क्षेत्रों में दलालों के जरिए किसानों को औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर किया गया, वहां के संबंधित पैक्स और एफपीओ का निबंधन तत्काल रद्द किया जाए.
SIT जांच की मांग
सुजीत मेहता ने पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि इस घोटाले में कई अधिकारियों और पैक्स संचालकों की संलिप्तता सामने आ सकती है. वहीं रूपेश कुमार ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की बदहाली पर आखिर कब तक पर्दा डाला जाएगा.
फर्जी आईडी और अवैध वसूली का आरोप
औलोंजा कला के किसान विवेकानंद कुमार ने अपने पैक्स अध्यक्ष पर फर्जी आईडी बनाकर अवैध वसूली करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चार महीने से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
एक पंचायत में कई पैक्स-एफपीओ पर सवाल
लखन मेहता ने भी एक ही पंचायत में कई एफपीओ और पैक्स को स्वीकृति देने पर सवाल खड़े करते हुए पूरे इचाक प्रखंड में व्यापक जांच की मांग की.
प्रशासन कार्रवाई का इंतजार
रंजीत कुमार, ज्ञानी प्रसाद मेहता, बबलू कुमार, सुनील कुमार, सिकेंद्र मेहता सहित सैकड़ों किसानों के हस्ताक्षर वाले इस आवेदन ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर किसानों की मेहनत और उम्मीदें यूं ही भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ती रहेंगी.
