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मानसून की फुहारों के बीच राज्यसभा चुनाव की अग्निपरीक्षा, पहरेदारी का दौर शुरू

Prerna Chourasia Ranchi: झारखंड के आसमान में छाए मानसून के बादलों ने मौसम का मिजाज तो सर्द कर दिया है, लेकिन सूबे...

Prerna Chourasia
Ranchi:  झारखंड के आसमान में छाए मानसून के बादलों ने मौसम का मिजाज तो सर्द कर दिया है, लेकिन सूबे की सियासी फिजाओं में उबाल ला दिया है. राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही झारखंड का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर है. नंबर गेम की बिसात बिछ चुकी है, मोहरे सजाए जा चुके हैं और गठबंधन व एनडीए दोनों ही खेमों में शह-मात का खेल शुरू हो चुका है. विधायकों की वफादारी पर शक और खरीद-फरोख्त के खौफ ने दोनों ही गठबंधनों की नींद उड़ा दी है.आलम यह है कि आज से विधायकों को ‘नजरबंद’ करने और कड़े पहरे में रखने की कवायद शुरू हो चुकी है.

परिमल नाथवाणी की एंट्री: कांग्रेस हाई अलर्ट पर 

इस चुनाव को सबसे ज्यादा दिलचस्प और आक्रामक बनाया है भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की एंट्री ने. नाथवाणी के मैदान में उतरते ही कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं.अगर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी को देखें, तो संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस का पलड़ा भारी और पूरी तरह दुरुस्त नजर आता है. लेकिन व्यावहारिक धरातल पर कांग्रेस इस वक्त सबसे ज्यादा असहज और डरी हुई है. इतिहास गवाह है कि राज्यसभा चुनाव में ‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘अंतरात्मा की आवाज’ बड़े-बड़े दावों को ढहते देर नहीं लगाती. यही वजह है कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख की लड़ाई बन चुका है.

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सीएम आवास में मॉक पोल और कड़ा पहरा 

अपने कुनबे को बिखरने से बचाने के लिए गठबंधन ने पूरी ताकत झोंक दी है. मंगलवार का दिन इस सियासी ड्रामे का टर्निंग पॉइंट होने जा रहा है.
रणनीति नंबर 1: मंगलवार को सबसे पहले कांग्रेस विधायक दल की एक आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें असंतोष की हर आवाज को दबाने की कोशिश होगी.
रणनीति नंबर 2: इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री आवास में गठबंधन दलों की एक महाबैठक होगी.

मॉक पोल से परीक्षा: सूत्रों के मुताबिक, सीएम आवास में केवल चर्चा नहीं होगी, बल्कि विधायकों से मॉक पोल (दिखावटी मतदान) कराया जाएगा. यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि वोटिंग की प्रक्रिया में कोई तकनीकी चूक न हो और ‘वोटिंग पेन’ या ‘वरीयता क्रम’ के खेल में एक भी वोट इधर-उधर न खिसके.

एनडीए का चक्रव्यूह: 18 जून तक ‘एक छत के नीचे’ रहेंगे माननीय!

दूसरी तरफ, एनडीए भी कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है. विपक्ष की हर चाल को नाकाम करने के लिए एनडीए ने भी अपने विधायकों की ‘किलाबंदी’ कर दी है. भाजपा और उसके सहयोगी दलों के विधायक आज से ही एक साथ रहेंगे। 18 जून को वोटिंग के दिन ही ये विधायक सीधे विधानसभा पहुंचेंगे. एनडीए का दावा है कि उनके कुनबे में पूरी एकजुटता है, लेकिन अंदरूनी डर ऐसा है कि विधायकों पर 24 घंटे कड़ी निगाहबानी रखी जा रही है ताकि विरोधी खेमा सेंधमारी न कर सके.

पहरेदारी बनाम लोकतंत्र 

झारखंड के इस राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सत्ता की मलाई के लिए लोकतंत्र में विधायकों की एकजुटता कितनी नाजुक होती है. एक तरफ जहां गठबंधन सरकार अपनी साख बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ परिमल नाथवाणी का ‘साइलेंट गेम’ किसी बड़े उलटफेर का इशारा कर रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि 18 जून को जब बैलट बॉक्स खुलेगा, तो मानसून की इस सियासी तपिश में किसकी राजनीति झुलसती है और कौन जीत का परचम लहराता है.

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