उग्रवाद के पुराने गढ़ में गूंजा पर्यावरण का शंखनाद: 16 किमी की दुर्गम चढ़ाई चढ़ चूल्हापानी पहुंचे राज्यपाल, कहा- ‘नदियां सिर्फ जलधारा नहीं, हमारी संस्कृति का आधार’

Ranchi: झारखंड के इतिहास में सोमवार का दिन एक अभूतपूर्व प्रशासनिक और सांस्कृतिक संदेश दे गया. कभी उग्रवादियों की पनाहगाह माने जाने...

Ranchi: झारखंड के इतिहास में सोमवार का दिन एक अभूतपूर्व प्रशासनिक और सांस्कृतिक संदेश दे गया. कभी उग्रवादियों की पनाहगाह माने जाने वाले लोहरदगा के घने जंगलों और बेहद दुर्गम रास्तों को चीरते हुए राज्य के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार सतह से 16 किलोमीटर ऊपर पहाड़ पर स्थित दामोदर के उद्गम स्थल चूल्हापानी पहुंचे. ऐसा करने वाले वे सूबे के पहले राज्यपाल बन गए हैं. गंगा दशहरा के पावन अवसर पर युगांतर भारती द्वारा आयोजित ‘देवनद-दामोदर महोत्सव-2026’में शामिल होकर उन्होंने न सिर्फ प्रकृति की इस अद्भुत छटा को नमन किया, बल्कि देश को पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश भी दिया. सुरक्षा चिंताओं के कारण जिला प्रशासन की हिचकिचाहट के बावजूद, कार्यकर्ताओं के आग्रह पर पहुंचे राज्यपाल ने पाकड़ के पेड़ से स्वतः हो रहे जल रिसाव के बीच भगवान विष्णु के स्वरूप ‘देवनद’ की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की.

यह भी पढ़ें: खराब प्रदर्शन पर डीसी सख्त, मनरेगा और आवास योजनाओं में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी

नदियों का संरक्षण सरकारी योजना नहीं, हमारा सामूहिक दायित्व

महोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का पूरा ध्यान वैश्विक पर्यावरण संकट और नागरिक कर्तव्यों पर केंद्रित रहा. उन्होंने कहा कि नदियां महज पानी के बहने का रास्ता नहीं हैं, बल्कि यह हमारी आस्था, जनजीवन और उद्योगों का मूल आधार हैं. कहा कि दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन और जल संकट के भयानक दौर से गुजर रही है. ऐसे में जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, तभी जीवन और विकास के बीच संतुलन बना रहेगा. उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से अपील की कि नदियों की स्वच्छता को सिर्फ सरकारों के भरोसे न छोड़ें. इसे प्रधानमंत्री के नमामि गंगे और लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट अभियानों की तरह एक बड़ा जन-संकल्प और जन-आंदोलन बनाना होगा.

2004 का प्रदूषित कल और आज 95% शुद्ध देवनद का सच

दामोदर बचाओ आंदोलन के जनक और विधायक सरयू राय ने आंदोलन के 22 वर्षों के सफर को साझा किया. कहा 2004 में दामोदर दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में शुमार थी, जहां फैक्ट्रियों का कचरा और कालिख बहती थी. तब इसी चूल्हापानी से हमने कोलकाता तक की जनजागरण सह अध्ययन यात्रा निकाली थी. आज केंद्र सरकार और हमारी टीम के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है कि दामोदर 95 प्रतिशत से अधिक शुद्ध हो चुकी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उद्गम स्थल से लेकर आगे के 30 किलोमीटर तक इस पुल्लिंग नदी को ‘देवनद’ कहा जाता है, जिसके तट पर जल्द ही भगवान विष्णु की भव्य शयन मुद्रा वाली प्रतिमा और मंदिर का निर्माण किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: झामुमो की घेराबंदी, भाजपा पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की आशंका जताते हुए चुनाव आयोग को लिखा पत्र

श्रेणी-डी से बाहर निकलेगा चूल्हापानी, रोजगार और पर्यटन को लगेंगे पंख

युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने राज्यपाल के आगमन को इस उपेक्षित क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि चूल्हापानी को वर्तमान में सरकार ने ‘डी’ श्रेणी का पर्यटन स्थल घोषित कर रखा है. स्थानीय लोगों ने राज्यपाल से मांग की है कि इसकी अद्भुत प्राकृतिक महत्ता को देखते हुए इसे कम से कम ‘बी’ श्रेणी में प्रमोट किया जाए. इस कदम से न केवल यहां पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन का विकास होगा, बल्कि क्षेत्र में पक्की सड़कों, पेयजल, शिक्षा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *