विस्थापितों के हक की लड़ाई दिल्ली तक: हजारीबाग सांसद ने ऊर्जा सचिव के सामने उठाए चार बड़े मुद्दे

Hazaribagh : हजारीबाग संसदीय क्षेत्र में NTPC की कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित हजारों रैयतों और विस्थापित परिवारों के हक की लड़ाई...

विस्थापितों के हक की लड़ाई दिल्ली तक

Hazaribagh : हजारीबाग संसदीय क्षेत्र में NTPC की कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित हजारों रैयतों और विस्थापित परिवारों के हक की लड़ाई एक बार फिर दिल्ली पहुंची है. सांसद ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल से मुलाकात कर पकरी बरवाडीह, केरेडारी, चट्टी-बरियातू, पकरी बरवाडीह नॉर्थ वेस्ट और तलाईपल्ली कोयला खनन परियोजनाओं से जुड़े पुनर्वास, मुआवजा और विस्थापन नीति में बदलाव की मांग जोरदार तरीके से उठाई. उन्होंने कहा कि हजारीबाग की जमीन देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, लेकिन अपनी जमीन गंवाने वाले कई परिवार आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं. ऐसे परिवारों को न्याय दिलाना प्राथमिकता है.

मार्च की बैठक के बाद फिर उठाया मुद्दा

सांसद ने बताया कि मार्च 2026 में भी इसी विषय पर ऊर्जा सचिव के साथ विस्तृत चर्चा हुई थी. उस समय प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन मिला था. इसके बाद लगातार क्षेत्र से मिल रही शिकायतों और सुझावों को एकत्र कर पुनः सचिव के समक्ष रखा गया और शीघ्र समाधान का आग्रह किया गया.

वर्तमान पुनर्वास नीति में व्यावहारिक खामियां

सांसद ने कहा कि NTPC की विभिन्न कोयला परियोजनाओं में लागू वर्तमान पुनर्वास नीति के कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनके कारण वास्तविक रूप से प्रभावित कई परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पा रहा है. कई पात्र लोग केवल तकनीकी कारणों से पुनर्वास और मुआवजे के लाभ से वंचित रह जाते हैं.

ऊर्जा सचिव के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें

बैठक में सांसद ने चार अहम मांगें रखीं- विस्थापन सहायता की पात्रता कट-ऑफ तिथि के बजाय वास्तविक भूमि अधिग्रहण की तिथि के आधार पर तय की जाए, ताकि अधिग्रहण के समय 18 वर्ष पूरे कर चुके सभी पात्र सदस्यों को पुनर्वास का लाभ मिल सके. अधिग्रहित भूमि में वैधानिक हिस्सेदारी रखने वाले सभी पात्र व्यक्तियों को, चाहे उनका आधार कार्ड किसी भी राज्य या स्थान का हो, यदि उनका स्वामित्व प्रमाणित है तो पुनर्वास और विस्थापन के सभी लाभ दिए जाएं. वर्तमान ₹24 लाख प्रति एकड़ मुआवजे को बढ़ाकर ₹40 लाख प्रति एकड़ किया जाए, ताकि किसानों को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप उचित प्रतिकर मिल सके. 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक पात्र सदस्य को मिलने वाली ₹10 लाख की एकमुश्त विस्थापन सहायता बढ़ाकर ₹15 लाख की जाए.

विकास के साथ न्याय भी जरूरी’

सांसद ने कहा कि हजारीबाग देश को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसलिए विकास और कोयला उत्पादन के साथ-साथ अपनी जमीन और घर देने वाले रैयतों और विस्थापित परिवारों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय इन जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक और संवेदनशील निर्णय लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा.

हजारीबाग, केरेडारी और बड़कागांव क्षेत्र में NTPC की कोयला परियोजनाओं के कारण वर्षों से मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और विस्थापन नीति को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है. प्रभावित परिवार लगातार कट-ऑफ तिथि, कम मुआवजा और पुनर्वास लाभ से वंचित रहने जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं. ऐसे में दिल्ली स्तर पर इन मांगों का फिर से उठाया जाना क्षेत्र के हजारों रैयतों और विस्थापित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब सभी की नजर ऊर्जा मंत्रालय के आगामी निर्णय पर टिकी है.

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