Ranchi: विधायक कल्पना सोरेन मुर्मू ने अपने आवास से आम की एक बेहद आकर्षक तस्वीर साझा कर राज्य में चुपचाप आ रही बागवानी क्रांति को केंद्र में ला दिया है. यह तस्वीर गवाह है कि कैसे कभी उपेक्षित रहने वाली राज्य की धरती अब हरे सोने की फसल उगल रही है. विधायक कल्पना ने कहा कि झारखंड के लगभग सभी जिलों में आम की बागवानी का विस्तार हुआ है. उत्पादन में यह ऐतिहासिक वृद्धि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत कर रही है.
मईयां के हाथों में कमान
यह वह सामाजिक बदलाव है, जिसने राज्य की महिलाओं (मंईयां) को आर्थिक रूप से सशक्त किया है. सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना ने राज्य के हजारों किसानों, विशेषकर महिला शक्ति को फलदार बागवानी से जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.राज्य के लगभग सभी 24 जिलों में आम और अन्य फलदार पौधों का रकबा तेजी से बढ़ा है. मईया न सिर्फ इन बागों की देखभाल कर रही हैं, बल्कि वे अब पूरी सस्टेनेबल इकोनॉमी को लीड कर रही हैं. झारखंड की धरती पर उपजे ये मीठे और रसीले आम अब देश की सीमाओं को लांघकर विदेशों में भी अपनी धाक जमा रहे हैं.
आत्मनिर्भरता की नई इबारत
कभी सिर्फ धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाला झारखंड का किसान आज बड़े पैमाने पर बागवानी की ओर रुख कर चुका है. कल्पना सोरेन की इस पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड के आमों की मिठास अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही है. वैश्विक मंच पर झारखंड के आमों की बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि सही नीति और जमीनी मेहनत मिलकर कमाल कर सकती हैं.
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