Click Here
Click Here

जिस भूमि का म्यूटेशन विनय सिंह और स्निग्धा सिंह के नाम हुआ उसका विक्रेता रिकॉर्डेड मालिक था ही नहीं

विनीत आभा उपाध्याय रांची: जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे और शराब घोटाला , वन भूमि घोटाला और आय से...

विनीत आभा उपाध्याय 

रांची:  जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे और शराब घोटाला , वन भूमि घोटाला और आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत पर रिहा हुए विनय सिंह 25  वर्षों से एक दूसरे के करीबी हैं और इसी करीबी मित्रता के कारण विनय चौबे ने सभी नियम और कानून को दरकिनार करते हुए उस भूमि की भी म्यूटेशन विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर कर दी जिस भूमि को बतौर DC रहते विनय चौबे को अवैध तरीके से खरीद-बिक्री करने वालों से बचाना था. यह टिप्पणी झारखंड  हाईकोर्ट ने विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में की है. 

add1

रिकॉर्डेड मालिक ही नहीं था विक्रेता 

वहीं ACB की जांच में यह पाया गया है कि जिस विक्रेता ने संपत्ति बेची वह संपत्ति का रिकॉर्डेड मालिक था ही नहीं.ऐसे में कानूनी रूप से इस भूमि का म्यूटेशन बिनय कुमार सिंह और स्निग्धा सिंह के नाम पर करने का कोई वैधानिक आधार नहीं था. 

Read Also: हजारीबाग की घटना पर पत्रकारों का आक्रोश: राज्यपाल के नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

DC रहते नियमों के विरुद्ध कराया गया दाखिल-खारिज 

अब तक मिले दस्तावेजों के मुताबिक  26 मई 2008 से 5 अक्टूबर 2010 के बीच अपनी पोस्टिंग के दौरान तत्कालीन उपायुक्त विनय चौबे ने गैर-मजरूआ खास जंगल झाड़ी भूमि के एक बड़े हिस्से का म्यूटेशन अवैध तरीके से करवाया. जांच के दौरान तत्कालीन अंचल अधिकारी अलका कुमारी, अंचल निरीक्षक और राजस्व कर्मचारी के बयानों ने मामले को और गंभीर बना दिया है. उनके बयानों के मुताबिक उपायुक्त रहते हुए विनय चौबे ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से सीधे निर्देश देकर नियमों के विरुद्ध जाकर म्यूटेशन करने के लिए मजबूर किया था.

Read Also: पश्चिमी सिंहभूम में भाजपा की जिला कार्य योजना बैठक, लक्ष्मण गिलुवा को दी श्रद्धांजलि

अधिकारियों पर दबाव डालकर कराया गया म्यूटेशन 

तत्कालीन अंचल अधिकारी अलका कुमारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उन्होंने इस म्यूटेशन पर आपत्ति जताई थी क्योंकि वह भूमि गैर-मजरूआ खास किस्म जंगल थी. बावजूद इसके विनय चौबे ने अपने पद का बलपूर्वक दुरुपयोग करते हुए उन पर दबाव डाला और बिनय कुमार सिंह और स्निग्धा सिंह के नाम पर दाखिल-खारिज करवाया. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विनय चौबे के विरुद्ध सीधे तौर पर आरोप हैं कि उन्होंने कानून और प्रक्रिया की अवहेलना करते हुए अपने पद का उपयोग व्यक्तिगत संबंधों को लाभ पहुँचाने के लिए किया.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *