Hazaribagh: झारखंड के अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैध बंदोबस्ती और भूमि संबंधी मामलों में कथित लूट-खसोट को लेकर झारखंड विस्थापित संघर्ष मोर्चा एवं किसान सभा के अध्यक्ष तथा पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज, एलपीसी निर्गत करने और जमीन का ऑनलाइन विवरण दर्ज करने जैसे कार्यों में व्यापक भ्रष्टाचार फैला हुआ है, जिससे आम जनता त्रस्त है.
राज्य के अधिकांश अंचल कार्यालयों में बिना अवैध भुगतान के न तो दाखिल-खारिज का कार्य होता है और न ही एलपीसी जारी की जाती है
भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकांश अंचल कार्यालयों में बिना अवैध भुगतान के न तो दाखिल-खारिज का कार्य होता है और न ही एलपीसी जारी की जाती है. उन्होंने कहा कि गैर-मजरूआ भूमि की हेराफेरी एवं अवैध बंदोबस्ती खुलेआम हो रही है, जिससे राजस्व कर्मचारियों, अंचल निरीक्षकों और अंचल अधिकारियों को भारी आर्थिक लाभ पहुंच रहा है. उन्होंने बताया कि तत्कालीन हजारीबाग उपायुक्त मुकेश कुमार के कार्यकाल में कटकमसांडी प्रखंड की तीन पंचायतों की जांच कराई गई थी, जिसमें लगभग 1700 एकड़ गैर-मजरूआ भूमि की अवैध बंदोबस्ती का मामला सामने आया था. उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही उपायुक्त का स्थानांतरण हो गया.
भूमि संबंधी अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार को एसआईटी गठन का प्रस्ताव भेजा गया था
पूर्व सांसद ने कहा कि उनके आवेदन पर ही बड़कागांव की पकरी बरवाडीह परियोजना क्षेत्र के गांवों में भूमि संबंधी अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार को एसआईटी गठन का प्रस्ताव भेजा गया था. सरकार द्वारा एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन भी किया गया. जांच के दौरान हजारों एकड़ भूमि की अवैध बंदोबस्ती का मामला सामने आया तथा एनटीपीसी द्वारा ऐसी भूमि पर लगभग 3000 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की बात उजागर हुई. उन्होंने दावा किया कि केरेडारी, कंडाबेर, बेलतू, हवाई, बिलारी और पांडू समेत कई गांवों में हजारों एकड़ भूमि की अवैध बंदोबस्ती पाई गई, जिनसे संबंधित मामले न्यायालय में लंबित हैं. पांडू गांव में स्वास्थ्य केंद्र और विद्यालय की भूमि पर भी कथित रूप से मुआवजा प्राप्त कर लेने का मामला सामने आया है.
अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि हजारीबाग शहर के आसपास कटकमसांडी, कटकमदाग, सदर एवं नगर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर अवैध बंदोबस्ती हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से वन भूमि पर भी अवैध जमाबंदी की गई है. उन्होंने बताया कि तत्कालीन उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने ऐसे मामलों की जांच के लिए 100 से अधिक फाइलें खुलवाई थीं. उन्होंने कहा कि बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र में अवैध बंदोबस्ती को वैध बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है. इस संबंध में उन्होंने कई बार राजस्व मंत्री, मुख्यमंत्री, राजस्व सचिव तथा हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़ और चतरा के उपायुक्तों को पत्र लिखकर जानकारी उपलब्ध कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
पूरे झारखंड में एक बड़ा उलगुलान खड़ा किया जाएगा
अंत में भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड सरकार एक ओर जल, जंगल और जमीन की रक्षा की बात करती है, जबकि दूसरी ओर इन संसाधनों की खुलेआम लूट जारी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए पूरे झारखंड में एक बड़ा उलगुलान खड़ा किया जाएगा.
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