Hazaribagh: जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण योजना में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. ग्रामीणों के आरोपों और शुरुआती पड़ताल के अनुसार, हजारीबाग के विभिन्न प्रखंडों में सरकारी राशि का बंदरबांट करने के लिए ‘कागजी शौचालयों’ का सहारा लिया गया है. आरोप है कि बिना निर्माण कार्य कराए ही सरकारी आंकड़ों में शौचालयों को पूर्ण दिखाकर लाखों रुपये की निकासी कर ली गई है.
पुराने शौचालयों को नया दिखाने का आरोप
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में वर्षों पुराने बने शौचालयों को नया दिखाकर एमआईएस पोर्टल पर फर्जी एंट्री कर दी गई. ग्रामीणों ने बताया कि मार्च 2026 में कई लाभार्थियों के खाते में 12 हजार रुपये की राशि भेजी गई, जिसमें से करीब 6 हजार रुपये तक की राशि बिचौलियों और विभागीय साठगांठ से ‘कमीशन’ के नाम पर वापस ले ली गई.

कई प्रखंड जांच के घेरे में
जांच के घेरे में जिले के दारू, बिष्णुगढ़, इचाक, सदर, कटकमसांडी, कटकमदाग, बड़कागांव और केरेडारी प्रखंड शामिल हैं. इन क्षेत्रों में विभागीय दावा है कि लगभग 1200 शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट बताई जा रही है.
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एक ही परिवार के नाम पर कई भुगतान
घोटाले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक ही परिवार के कई सदस्यों . जैसे बहू, ससुर, भाई और देवर . के नाम पर अलग-अलग लाभ दिखाकर राशि निकाली गई है. कई लाभार्थियों को तो यह तक जानकारी नहीं है कि उनके नाम पर शौचालय स्वीकृत हुआ था. ग्रामीणों ने जल सहिया और स्थानीय कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
जियो-टैगिंग प्रक्रिया पर सवाल
बिना निर्माण कार्य के भुगतान होने से विभाग की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गई है. सवाल उठ रहा है कि यदि शौचालय बना ही नहीं, तो उसकी जियो-टैगिंग और भौतिक सत्यापन कैसे सफल हो गया. ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
विभाग ने जांच का दिया भरोसा
कार्यपालक अभियंता अनिल गुप्ता ने बताया कि मामले की पूरी जांच कराई जाएगी. इस अनियमितता में जो भी अधिकारी या कर्मी संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
