Hazaribagh: क्या किसी हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए दोषी 48 वर्षों तक खुलेआम घूमते रहें और सिस्टम उन्हें पकड़ न सके? यह सवाल इचाक थाना क्षेत्र के करियातपुर गांव निवासी अशोक प्रसाद कसेरा ने उठाया है. उन्होंने इचाक थाना, हजारीबाग पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर वर्ष 1976 के बहुचर्चित हत्या कांड के दो फरार दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और उन्हें सजा दिलाने की मांग की है.

दादा की हत्या, पिता बने गवाह, अब पोता मांग रहा न्याय
अशोक प्रसाद कसेरा ने अपने पत्र में बताया है कि वर्ष 1976 में मामूली विवाद को लेकर उनके दादा मेघल साव पर गांव के ही कुछ लोगों ने हथौड़ी, बसूली और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया था. गंभीर चोटों के कारण घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई थी. इस मामले में दर्ज जीआर केस संख्या 2223/76 के सूचक एवं प्रत्यक्षदर्शी गवाह उनके पिता मथुरा साव कसेरा थे, जिनका निधन 15 फरवरी 2021 को हो चुका है. अब तीसरी पीढ़ी के रूप में अशोक प्रसाद कसेरा न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं.
अदालतों ने बरकरार रखी उम्रकैद की सजा
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने घटना को सत्य पाते हुए 23 अप्रैल 1981 को चारों आरोपियों रामधनी साहू, नारायण साहू, महेंद्र साहू और राजेंद्र साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ दोषियों ने पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील संख्या 79/1981 दायर की. लेकिन हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 1983 को अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और सभी दोषियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया.
दो दोषियों ने काटी सजा, दो अब भी फरार
पत्र के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश के बाद रामधनी साहू और नारायण साहू ने आत्मसमर्पण कर सजा काट ली. लेकिन अन्य दो दोषी महेंद्र साहू और राजेंद्र साहू फरार हो गए. अशोक प्रसाद कसेरा का आरोप है कि दोनों दोषी आज भी जीवित हैं और नाम बदलकर तथा पहचान छुपाकर दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों में रह रहे हैं. इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
48 वर्षों से लंबित सवाल
मृतक के पोते का कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है. उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो दोषी इतने लंबे समय तक फरार नहीं रह सकते थे. उन्होंने कहा कि एक हत्या के मामले में अदालतों द्वारा दोष सिद्ध किए जाने और उम्रकैद की सजा बरकरार रहने के बावजूद दो अभियुक्तों का लगभग पांच दशक तक गिरफ्त से बाहर रहना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है.
तीन पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन इंसाफ अधूरा है
अशोक प्रसाद कसेरा ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके दादा की हत्या हुई, उनके पिता ने गवाही देकर न्यायिक लड़ाई लड़ी, लेकिन अब पिता के निधन के बाद भी परिवार को पूरा न्याय नहीं मिल पाया है. उन्होंने कहा कि सिस्टम की खामोशी और प्रशासन की लापरवाही के कारण तीन पीढ़ियां बीत गईं, लेकिन मेरे दिवंगत दादा को आज तक पूर्ण न्याय नहीं मिल सका. दोषियों की गिरफ्तारी और सजा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है.
परिवार ने की गिरफ्तारी की मांग
पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फरार दोषियों की वर्तमान पहचान और ठिकानों का पता लगाकर तत्काल गिरफ्तारी की जाए तथा अदालत द्वारा सुनाई गई सजा का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार को राहत मिल सके.
