Ranchi: राज्य सरकार ने झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के दो तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को आरोपमुक्त कर दिया है. सरकार की उच्च स्तरीय समीक्षा और न्यायालय के फैसलों के बाद इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय और कानूनी कार्रवाइयों पर विराम लग गया है.
सोलर लाइट खरीद मामला: पवन कुमार महतो हुए बेदाग
रामगढ़ के गोला में तत्कालीन बीडीओ पवन कुमार महतो पर सोलर लाइट, एलईटी स्ट्रीट लाइट और पानी टैंकर की खरीदारी में वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगा था. वर्ष 2018 से शुरू हुई इस जांच में उपायुक्त (रामगढ़) की क्लीन चिट और अप्रैल 2025 में संचालन पदाधिकारी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी.
एंटी करप्शन ब्यूरो ट्रैप मामला: अशोक कुमार सिन्हा को कोर्ट से मिली मुक्ति
गढ़वा के विशुनपुरा में तत्कालीन BDO अशोक कुमार सिन्हा को वर्ष 2017 में पलामू एसीबी ने 10,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार करने का दावा किया था. जांच में सामने आया कि जिस ‘बकरी शेड योजना’ में घूस लेने का दावा था, वैसी कोई योजना पंचायत में स्वीकृत ही नहीं थी. पलामू की विशेष निगरानी अदालत ने 21 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा. कोर्ट ने श्री सिन्हा को बाइज्जत बरी कर दिया.
निलंबन अवधि अब ‘ड्यूटी’ मानी जाएगी
अदालती फैसले और पलामू जिला अभियोजन कार्यालय द्वारा कोई अपील दायर न करने की रिपोर्ट के बाद, सरकार ने अशोक कुमार सिन्हा को न सिर्फ आरोपमुक्त किया है, बल्कि उनके 13 सितंबर 2017 से 05 अक्तूबर 2018 तक की निलंबन अवधि को ‘झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016’ के तहत कर्तव्य पर बिताई गई अवधि के रूप में मान्य करने का आदेश जारी किया है. कार्मिक ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है.
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