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यूपी पुलिस ने कोडरमा के दो साइबर अपराधी गिरोह को किया गिरफ्तार, चार पहिया वाहन समेत कई उपकरण बरामद

MAHADEV KUMAR Koderma: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कोडरमा जिले के...

MAHADEV KUMAR

Koderma: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कोडरमा जिले के नवलशाही थाना क्षेत्र निवासी दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों को हजारीबाग से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने इनके पास से एक चार पहिया वाहन, पीओएस मशीन, दर्जनों डेबिट-क्रेडिट कार्ड और चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं.

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फर्जी फेसबुक विज्ञापन के जरिए हुई थी 12 लाख की ठगी

जानकारी के अनुसार, सोनभद्र के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. प्रेम बहादुर गौतम ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके फेसबुक अकाउंट पर इंडसइंड बैंक के नाम से पेंशनर संबंधी एक फर्जी विज्ञापन और लिंक प्रदर्शित हुआ था. बैंक की आधिकारिक सेवा समझकर उन्होंने लिंक खोला और अपनी बैंकिंग तथा व्यक्तिगत जानकारी साझा कर दी. साइबर अपराधियों ने इन जानकारियों का दुरुपयोग करते हुए इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से 5-5 लाख रुपये के दो और 2 लाख रुपये के एक ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 12 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली.

तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने साइबर क्राइम टीम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. पुलिस टीम ने बैंक खातों का विश्लेषण, मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की गई.

हजारीबाग से हुई गिरफ्तारी

निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम झारखंड पहुंची. टीम ने हजारीबाग में छापेमारी कर नवलशाही थाना क्षेत्र के धरगांव निवासी धीरज कुमार और फुलवरिया निवासी रवि मेहता को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक पीओएस मशीन, एक चार पहिया वाहन, दर्जनों क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड तथा चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए.

लोगों के नाम पर खुलवाते थे बैंक खाते

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न प्रलोभन देकर लोगों का केवाईसी (KYC) विवरण प्राप्त करते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे. खाता खुलने के बाद पासबुक की प्रति संबंधित व्यक्ति को दे दी जाती थी, जबकि डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अपने पास रख लेते थे. बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था. पुलिस मामले की आगे जांच कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है.

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