अमेरिका ने वीजा नियमों में किया बदलाव, छात्रों, पत्रकारों और एक्सचेंज विजिटर्स की बढ़ेगी समस्या

NewsWave Desk : अमेरिका ने वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए किया...

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NewsWave Desk : अमेरिका ने वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए किया गया है. अमेरिकी के गृह सुरक्षा विभाग ने दशकों से लागू व्यवस्था को समाप्त कर दिया है. जिसके तहत छात्र अपने कोर्स की अवधि तक बिना तय समय सीमा के अमेरिका में रह सकते थे. नए नियम लागू होने के बाद एफ, जे और आई वीजा धारकों के लिए रहने की अवधि तय कर दी गई है. इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.

इमिग्रेशन सिस्टम को मजबूत बनाना है

अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य इमिग्रेशन सिस्टम को मजबूत बनाना है. वीजा के दुरुपयोग के रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा बेहतर करना है. वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबे समय वाले कोर्स करने वाले विदेशी छात्रों के सामने अतिरिक्त प्रक्रिया और चुनौतियां बढ़ सकती है.

ग्रेस पीरियड की अवधि घटकार 30 दिन की गयी

नये नियमों के तहत छात्रों, एक्सचेंज विजिटर और पत्रकारों को अब अनिश्चित अवधि तक रहने की अनुमति नहीं मिलेगी. F और J वीजा धारकों को उनके कोर्स की अवधि तक, लेकिन अधिकतम 4 साल के लिए ही अमेरिका में रहने की अनुमति होगी. इसके अलावा पढ़ाई के पूरी करने के बाद अमेरिका छोड़ने, किसी दूसरे इंस्टीट्यूट में ट्रांसफर लेने या वीजा स्टेटस बदलने के लिए मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड भी घटाकर 30 दिन कर दी गई है. पत्रकारों के लिए I वीजा की अधिकतम अवधि 240 दिन तय की गई है. जबकि चीनी नागरिकों के लिए यह सीमा 90 दिन होगी.

एक्सटेंशन ऑफ स्टेट के लिए आवेदन करना जरूरी

अगर किसी छात्र का कोर्स 4 साल से ज्यादा का है. ऐसे में उसे अमेरिका में रहने के लिए यूएस US सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विस से औपचारिक रूप से एक्सटेंशन ऑफ स्टेट के लिए आवेदन करना होगा. इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, बैकग्राउंड जांच और दूसरी सुरक्षा जांच शामिल होगी.

भारतीय छात्रों की बढ़ेगी मुसीबत

भारतीय छात्रों की पहली पसंद अमेरिका है. एक रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में अमेरिका के कॉलेज और विश्वविद्यालय में 3.63 लाख से ज्यादा भारतीय पढ़ रहे थे.जो वहां के कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लगभग 31 प्रतिशत है. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों की है जो पीएचडी PHD रिसर्च आधारित मास्टर्स और लंबे अकेडमिक कार्यक्रमों में एडमिशन लिए हुए है. नए नियम लागू होने के बाद ऐसे छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए एक्स्ट्रा सरकारी मंजूरी लेनी होगी. इससे आवेदन प्रक्रिया लंबी हो सकती है और प्रशासनिक औपचारिकताएं बढ़ सकती है.

 

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