Ranchi: झारखंड में बालू घाट की नीलामी का टेंडर हो गया, बालू घाटों की बंदोबस्ती भी हो गई और जिलों के DC ने सभी कागजी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद खनन पट्टा पर साइन भी कर दिया. लेकिन इसके बावजूद अब तक बालू घाटों से बालू का उठाव शुरू नहीं किया जा रहा है. खनन क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि जिन कंपनियों ने बालू घाट के टेंडर लिए हैं, वो सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी फिलहाल बालू का उठाव इसलिए शुरू नहीं कर रही. क्योंकि अगले कुछ ही दिनों में बालू के खनन पर NGT की रोक लग जाएगी ऐसे में सिर्फ कुछ दिनों तक ही दिनों तक खनन और उठाव का काम कर पाएंगी.
अवैध तरीके से हो रहा खनन
कुछ दिनों के बाद बालू घाटों से वैध तरीके से न तो खनन किया जा सकेगा और न ही उठाव. बालू कारोबार से जुड़े लोगो के मुताबिक बालू घाट ले चुकी कंपनियां खुद उठाव करने में देरी कर रही हैं और अवैध बालू के कारोबार की शिकायत अलग-अलग फोरम में कर रही है. और मीडिया में खबर भी प्रकाशित कराया जा रहा है. जिससे खनन विभाग और पुलिस प्रसाशन पर उंगली उठ रही है. खनन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के आधा दर्जन जिलों के 20 से ज्यादा बालू घाट के खनन लीज पर जिलों के DC ने साइन कर दिया है.

राज्य में 290 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है
राज्य में कुल 444 बालू घाट है. इसमें से 290 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है. बालू उठाव पर NGT की रोक से पहले खनन विभाग की तरफ से लिया गया यह काफी बड़ा कदम है, लेकिन इसके बाद भी बालू घाटों से बालू का उठाव नहीं होने से बालू की कालाबाजारी बढ़ सकती है. वहीं, दूसरी तरह बालू उठाव नहीं होने के पीछे सीटीओ की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है.
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