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अधिकारियों को कमीशन लेते आपने सुना होगा, लेकिन अब ठेकेदार ले रहे हैं अफसरों से रिश्वत, पढ़ें और देखें पूरी खबर

Akshay Kumar Jha Ranchi: शायद ही ऐसा कोई टेंडर होता होगा, जिसमें कमीशन का खेल नहीं होता हो. अमूमन टेंडर पाने के...

ठेकेदार ले रहे हैं अफसरों से रिश्वत
ठेकेदार ले रहे हैं अफसरों से रिश्वत

Akshay Kumar Jha

Ranchi: शायद ही ऐसा कोई टेंडर होता होगा, जिसमें कमीशन का खेल नहीं होता हो. अमूमन टेंडर पाने के लिए या फिर टेंडर के काम को पूरा करने और सही समय पर पेमेंट लेने के लिए ठेकेदार अधिकारियों को कमीशन देते हैं. जाहिर तौर पर ऐसा सभी विभागों में होता है. लेकिन झारखंड का एक विभाग है, जहां अधिकारियों की तरफ से ठेकेदारों को कमीशन दिया जा रहा है. मामला है भवन निर्माण विभाग का. प्रमंडल है बोकारो. दरअसल, यहां कुछ दिनों पहले भवन निर्माण विभाग, बोकारो प्रमंडल की तरफ से पेवर ब्लॉक लगाने का टेंडर निकला. यह काम बोकारो के जैप-4 के कार्यालय परिसर में किया जाना था. टेंडर की प्राक्कलन राशि 21,64,250 रुपए की थी. और सबसे अहम बात कि वहां के कार्यपालक अभियंता चाह रहे थे कि यह काम उनके करीबी को मिले. तो हो गया खेला शुरू.

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59 लोगों में बंटे 20 फीसदी कमीशन

टेंडर निकलने के बाद टेंडर फॉर्म खरीदने की तिथि 23 जून तक थी. इस टेंडर में भाग लेने के लिए पांच हजार रुपए का ड्राफ्ट भी लगाना था. तो बोकारो के 59 ठेकेदारों ने टेंडर पेपर खरीदा. सभी ने पांच हजार रुपए के ड्राफ्ट के साथ टेंडर भर दिया. लेकिन वहां के साहब की मर्जी थी कि यह काम उनके करीबी को मिले. तो उन्होंने ऐलान कराया कि सभी ठेकेदार अपना टेंडर वापस ले लें. इस टेंडर में वे भाग न लें. शर्त रखी गई कि टेंडर पेपर और पांच हजार के ड्राफ्ट के अलावा सभी को टेंडर की प्राक्कलन राशि का 20 फीसदी कमीशन भी मिलेगा. फिर क्या था. बिना काम किए अगर कमीशन मिल रहा है, तो कोई कैसे मना करे.

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सभी ठेकेदारों को मिले 7400 रुपए

24 जून को टेंडर का फॉर्म कार्यालय में जमा करना था. तीन बजे का समय तय किया गया था. वहीं टेंडर खुलने का समय 3.30 बजे रखा गया था. सभी ठेकेदार कार्यालय में हाजिर हो गए और एक-एक कर कंपनी का नाम पुकार कर सभी के हाथों में टेंडर फॉर्म के साथ पांच हजार का ड्राफ्ट और कैश 7400 रुपए थमाए जाने लगे. तभी वहां मौजूद किसी ठेकेदार ने अपने कैमरे की वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी. सारा मामला मोबाइल के कैमरे में कैद हो गया. हो-हंगामे के बीच सभी ठेकेदारों को अपने हिस्से के पैसे मिल गए. तो ऐसे सारा खेल भवन निर्माण, बोकारो प्रमंडल के कार्यालय में खेला गया.

नोट– इस मामले पर कार्यपालक अभियंता अमृत टोप्नो का बयान लेने के लिए उन्हें कई बार फोन किया गया. लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. इसके बाद उन्हें व्हाट्सऐप और नॉर्मल फोन पर मैसेज भी किया गया. लेकिन उन्होंने जवाब देना सही नहीं समझा. अगर उनका कोई पक्ष आता है, तो उसे जरूर प्रकाशित किया जाएगा.

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