गिरिडीह: खनन को लेकर विवाद गहराया, ग्रामीणों ने की जांच की मांग

Giridih: धनवार प्रखंड के खैरीडीह गांव में M/S Warish Stone Mining Operation, Khairidih को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. ग्रामीणों...

खनन

Giridih: धनवार प्रखंड के खैरीडीह गांव में M/S Warish Stone Mining Operation, Khairidih को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. ग्रामीणों ने खनन कंपनी पर स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर कथित रूप से खनन करने, रैयती, रजिस्ट्री एवं खतियानी जमीन को खनन की जद में लेने, ग्रामीण आबादी के बेहद करीब ब्लास्टिंग व भारी मशीनों के संचालन तथा सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है. मामले को लेकर ग्रामीणों ने धनवार अंचल कार्यालय में आवेदन देकर तत्काल संयुक्त स्थल निरीक्षण, GPS आधारित सीमांकन और कथित अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित परियोजना के लिए करीब 4.50 एकड़ भूमि पर लीज स्वीकृत है, लेकिन वास्तविक खनन गतिविधि कथित तौर पर निर्धारित लीज सीमा से बाहर तक फैल गई है. आरोप है कि आसपास की कुछ जमीनें रैयती, रजिस्ट्री एवं खतियानी हैं, जिन्हें खनन के लिए लीजधारी को हस्तांतरित किए जाने का ग्रामीणों के पास कोई स्पष्ट आधार नहीं है. ग्रामीणों ने प्रशासन से रजिस्टर-2, रजिस्ट्री/कवाला, खतियान, लीज दस्तावेज, स्वीकृत लीज नक्शा और वास्तविक GPS को-ऑर्डिनेट का मिलान कर मौके पर सीमांकन कराने की मांग की है.

60-70 मीटर की दूरी पर ग्रामीणों के घर, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

ग्रामीणों के अनुसार खनन क्षेत्र से कई मकान महज 60 से 70 मीटर की दूरी पर हैं. ऐसे में भारी मशीनों की आवाजाही, पत्थर तोड़ने की गतिविधियों और कथित ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन स्थल निरीक्षण के दौरान प्रत्येक प्रभावित घर और खनन क्षेत्र की वास्तविक दूरी का वैज्ञानिक एवं GPS आधारित मापन कराए, ताकि सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके.

DGMS के आदेशों को लेकर भी उठे सवाल

आवेदन में ग्रामीणों ने DGMS, कोडरमा क्षेत्र से संबंधित कथित सुरक्षा आपत्तियों, Danger Zone एवं Stop Order से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित क्षेत्र के संबंध में वास्तव में कोई सुरक्षा निर्देश या रोक संबंधी आदेश जारी हुआ था, तो उसके बावजूद खनन गतिविधियां किस आधार पर संचालित हो रही हैं, इसकी जांच जरूरी है. ग्रामीणों ने प्रशासन से DGMS के सभी संबंधित आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट एवं सुरक्षा निर्देश मंगाकर उनके अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है.

खुली खदान और सुरक्षा घेराबंदी पर भी सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन क्षेत्र के आसपास पर्याप्त सुरक्षा घेराबंदी और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं. इससे ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों के खुले खनन गड्ढों अथवा जोखिम वाले स्थानों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है. ग्रामीणों ने तत्काल सुरक्षा घेराबंदी और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है.

खनन विवाद के बीच हिंसा का मुद्दा भी गरमाया

आवेदन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि 22 अप्रैल को अवैध खनन रोकने के प्रयास से जुड़े विवाद के बीच एक हत्या की घटना भी हुई थी. हालांकि इस घटना का खनन विवाद से प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं, यह जांच का विषय है और इसका अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी द्वारा ही किया जाना चाहिए. ग्रामीणों का कहना है कि घटना ने क्षेत्र में व्याप्त तनाव की गंभीरता को जरूर उजागर किया है. इसके अलावा ग्रामीणों ने खनन का विरोध करने पर कथित रूप से धमकी, दबाव, अभद्र व्यवहार और मारपीट की शिकायत भी की है. उन्होंने मांग की है कि पूर्व में थाना स्तर पर दिए गए आवेदन, GD, सनहा और FIR की समीक्षा कर यह देखा जाए कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हुई या नहीं.

उदय कुमार सिंह की भूमिका पर भी जांच की मांग

ग्रामीणों ने आवेदन में आरोप लगाया है कि वर्तमान में उदय कुमार सिंह द्वारा खनन गतिविधियों के संचालन/प्रबंधन की भूमिका निभाई जा रही है और बाहरी लोगों के माध्यम से खनन कार्य कराया जा रहा है. हालांकि किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता. ग्रामीणों ने प्रशासन से लीजधारी, वास्तविक संचालक, ठेकेदार, मशीन मालिक और खनन एवं परिवहन से जुड़े सभी लोगों की दस्तावेजी जांच कराने की मांग की है.

बाबूलाल मरांडी की राजनीति पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल

मामले ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ना शुरू कर दिया है. ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि भाजपा के प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी राज्य में अवैध खनन के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरते रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से भी ऐसे मामलों को उठाते रहे हैं. ऐसे में उनके करीबी बताए जाने वाले उदय कुमार सिंह से जुड़े खनन विवाद के आरोपों पर उनकी ओर से क्या रुख सामने आता है, यह देखने वाली बात होगी. हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक निकटता या संगठनात्मक संबंध मात्र से खनन संबंधी आरोप सिद्ध नहीं होते. यदि उदय कुमार सिंह की भूमिका को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उसका निष्पक्ष परीक्षण दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड, लीज नक्शा, GPS सीमांकन और खनन विभाग की जांच के आधार पर ही होना चाहिए. इसी तरह बाबूलाल मरांडी की किसी प्रकार की संलिप्तता का आरोप भी बिना प्रमाण के तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता. लेकिन सवाल बड़ा है—क्या सरकार उन आरोपों की भी उसी गंभीरता से जांच कराएगी, जिनमें प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं? या फिर खैरीडीह के ग्रामीणों का आवेदन भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा

ग्रामीणों ने प्रशासन से कुल 11 प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें 4.50 एकड़ स्वीकृत लीज का GPS सीमांकन, लीज से बाहर कथित खनन पर तत्काल रोक, रैयती एवं खतियानी जमीन की जांच, DGMS के आदेशों का सत्यापन, मकानों से खनन क्षेत्र की दूरी का वैज्ञानिक सर्वे, सुरक्षा घेराबंदी, ब्लास्टिंग और परिवहन की अनुमति की जांच तथा ग्रामीणों को कथित धमकी की निष्पक्ष जांच शामिल है. अब निगाहें जिला प्रशासन, खान विभाग, DGMS और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं. यदि जांच निष्पक्ष और मौके पर जाकर होती है तो लीज की वास्तविक सीमा, खनन की वास्तविक स्थिति और आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है. लेकिन यदि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रही, तो ग्रामीणों के बीच यह सवाल और गहरा सकता है कि आखिर खैरीडीह में कानून चलेगा या प्रभावशाली लोगों का दबाव? ग्रामीणों ने साफ कहा है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अपनी जमीन, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर मौके पर संयुक्त सीमांकन और जांच कराता है या फिर मामला आवेदन और फाइलों के बीच ही उलझा रहता है.

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