Delhi : राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है. जमीन के बदले नौकरी मामले में अदालत ने सीबीआई की एफआईआर और आरोपपत्र को रद्द करने की लालू प्रसाद यादव की याचिका को खारिज कर दिया है. यह नौकरी के बदले जमीन घोटाला पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर (मध्य प्रदेश) स्थित जोन में ग्रुप डी की नियुक्तियों से संबंधित है. यह नियुक्तियां लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल (2004-2009) के दौरान हुई थीं. इन नियुक्तियों के बदले में, कथित तौर पर जमीन लालू प्रसाद के परिवार या सहयोगियों के नाम पर उपहार के तौर पर या हस्तांतरित किए गए थे.
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हाईकोर्ट ने सीबीआई से मांगा जवाब
इससे पहले हाईकोर्ट ने सोमवार को नौकरी के बदले जमीन मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा. न्यायमूर्ति मनोज जैन की एकल पीठ ने राबड़ी देवी की याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की है.
ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई है चुनौती
राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 1,600 से अधिक अप्रयुक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने से इन्कार किया गया था. यह दस्तावेज जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा जब्त किए गए थे, लेकिन अभियोजन पक्ष ने इन्हें अपनी चार्जशीट में शामिल नहीं किया है. 18 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राबड़ी देवी और उनके पति पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिकाओं को खारिज कर दिया था.
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“आरोपियों को हर दस्तावेज स्वतः प्राप्त करने का अधिकार नहीं”
कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल की इस प्रारंभिक अवस्था में सभी अप्रयुक्त दस्तावेज एक साथ उपलब्ध कराना घोड़े से पहले गाड़ी रखन जैसा होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो सकती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को हर दस्तावेज स्वतः प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. अभियोजन पक्ष पहले अपने सबूत पेश करेगा, उसके बाद आवश्यकता पड़ने पर ही आगे की कार्रवाई होगी.
