रामगढ़: महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर निकलीं देश की जानी-मानी एंड्योरेंस साइक्लिस्ट और पर्वतारोही आशा मालवीय का विजय रथ अब अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहा है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली आशा वर्तमान में एक विशाल राष्ट्रव्यापी साइक्लिंग अभियान पर हैं. रामगढ़ एसपी अजय कुमार के द्वारा महिला साइक्लिस्ट आशा मालवीय को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाई दिया गया.

78वें सेना दिवस को समर्पित अभियान
आशा मालवीय ने इस विशेष अभियान की शुरुआत 11 जनवरी को जयपुर से की थी.भारतीय सेना के सम्मान में और 78वें भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह यात्रा भारत के पश्चिम से शुरू होकर सुदूर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश के कीबिथू तक जाएगी. कुल लक्ष्य लगभग 7,800 किलोमीटर का है. अब तक 5,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर रामगढ़ पहुंच चुकी हैं.
महिला सुरक्षा, धैर्य, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है उद्देश्य
एक साधारण परिवार में जन्मी आशा की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है. उनके पिता के निधन के बाद उनकी माताजी ने मजदूरी करके परिवार को संभाला. अभावों के बीच भी आशा ने हार नहीं मानी. उन्होंने न केवल खुद को एक एथलीट के रूप में स्थापित किया, बल्कि नौकरी कर अपनी बहन का विवाह भी संपन्न कराया.
उपलब्धियों का शानदार रिकॉर्ड
आशा केवल एक साइक्लिस्ट ही नहीं, बल्कि एक कुशल पर्वतारोही भी हैं. जिनमें बीसी.रॉय (20,500 फीट) और तेनजिंग खान (19,500 फीट) पर सफल आरोहण. एथलेटिक्स में 100 और 200 मीटर दौड़ की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी.
