Pakur: अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति, झारखंड ने वर्ष 2026- 27 के लिए अनुसूचित जनजाति आवासीय बालक उच्च विद्यालय, हिरणपुर की नामांकन सूची पर आपत्ति जतायी है. समिति के महासचिव शिवचरण मालतो ने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया में आदिम जनजाति समुदाय के छात्रों की उपेक्षा की गयी है. इससे उनके शिक्षा के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने इसे मानवीय भूल बताते हुए मेधा सूची में संशोधन की मांग की. आवेदन में कहा गया है कि झारखंड सरकार के नियमों के अनुसार विद्यालयों में नामांकन के लिए 85 प्रतिशत ग्रामीण और 15 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के छात्रों के लिए आरक्षित है. साथ ही कुल सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से आदिम जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित है. इसके बावजूद वर्तमान सूची में इन नियमों का पालन नहीं किया गया.
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चयन प्रक्रिया पर उठाये गये सवाल
समिति ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय विद्यालय के शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है. संगठन ने जिला कल्याण पदाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर मेधा सूची में सुधार करने की मांग की है.

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