रांची: पूर्वोत्तर राज्यों में चिटफंड के नाम पर भारी रिटर्न का झांसा देकर हजारों निवेशकों से ठगी करने के आरोपी प्रयाग ग्रुप के मालिक वासुदेव बागची ने झारखंड हाई कोर्ट से अपनी दो याचिकाएं वापस ले ली हैं. यह मामला करीब 2800 करोड़ रुपये की कथित ठगी से जुड़ा हुआ है.
जेल में बंद होने का दिया हवाला
मामले में जानकारी दी गई कि वर्ष 2020 में दाखिल क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन को वापस लेते हुए अधिवक्ता अमित सिन्हा ने अदालत को बताया कि वासुदेव बागची 29 नवंबर 2024 से कोलकाता जेल में बंद हैं. ऐसे में झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज ECIR में भी उन्हें प्रोडक्शन करने की मांग की गई.
ALSO READ: चाईबासा: सारंडा में नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान हादसा, कोबरा जवान शहीद
2800 करोड़ में से केवल 700 करोड़ लौटाए
आरोप है कि वासुदेव बागची और उनके पुत्र ने मासिक आय योजना और क्लब सदस्यता प्रमाण पत्र के नाम पर निवेशकों से करीब 2800 करोड़ रुपये जमा कराए. उच्च रिटर्न का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया, लेकिन निवेशकों को महज 700 करोड़ रुपये ही वापस किए गए. अब भी करीब 1900 करोड़ रुपये निवेशकों को नहीं लौटाए गए हैं.
कई राज्यों में दर्ज हैं मामले
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने विभिन्न राज्यों में कार्रवाई करते हुए कई केस दर्ज किए हैं. छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं.
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, प्रयाग ग्रुप ऑफ कंपनी ने सेबी और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से आवश्यक वैध अनुमति नहीं ली थी, बावजूद इसके कंपनी निवेश योजनाएं चला रही थी. मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है.
