SAURAV SINGH

रांची: झारखंड में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए हेमंत सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य पुलिस के बेड़े को नया रूप दिया जा रहा है. जल्द ही प्रदेश के विभिन्न थानों में खटारा और जर्जर हो चुकी गाड़ियों की जगह नई रफ्तार वाली गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी.
जर्जर वाहनों से पीछा छूटा, अब 900 बोलेरो संभालेंगी मोर्चा:
राज्य सरकार द्वारा झारखंड पुलिस के लिए 900 नई बोलेरो गाड़ियों की खरीदारी की गई है. वर्तमान में इन वाहनों को पुलिस के रंग-रूप में ढालने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. रांची में इन गाड़ियों पर झारखंड पुलिस के आधिकारिक स्टिकर, लोगो और सायरन लाइट लगाने का कार्य किया जा रहा है. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, इन वाहनों को राज्य के सभी 24 जिलों के थानों में आवंटित कर दिया जाएगा.
अपराधी नई गाड़ियों में, पुलिस पुरानी में अब बदलेगी तस्वीर:
इस निर्णय के पीछे का सबसे बड़ा कारण पुलिस की कार्यक्षमता में सुधार लाना है। दरअसल, लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि अपराधी वारदातों को अंजाम देने के लिए आधुनिक और तेज रफ्तार वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि पुलिस के पास मौजूद गाड़ियां काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी थीं.पुरानी गाड़ियों के कारण पुलिस कई बार अपराधियों का पीछा करने में पिछड़ जाती थी, जिससे अपराधी भागने में सफल हो जाते थे. नए वाहनों के आने से पुलिस की रिस्पॉन्स टाइम (घटनास्थल पर पहुंचने का समय) में सुधार होगा और अपराधियों का पीछा करना आसान होगा.
2015 के बाद अब हुआ बड़ा बदलाव:
गौरतलब है कि झारखंड में पुलिस वाहनों की बड़ी खेप आखिरी बार 2015 में रघुवर दास की सरकार के दौरान खरीदी गई थी. पिछले नौ वर्षों में इन गाड़ियों की हालत काफी खराब हो चुकी थी और रख-रखाव का खर्च भी बढ़ गया था.पुलिस मुख्यालय की ओर से लगातार नए वाहनों की मांग की जा रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए वर्तमान सरकार ने इस बड़े निवेश को मंजूरी दी है. इन नए वाहनों के आने से न केवल गश्ती तेज होगी, बल्कि दूर-दराज के नक्सल प्रभावित और ग्रामीण इलाकों में भी पुलिस की पहुंच सुगम होगी. पुलिस कर्मियों के लिए भी यह राहत की बात है, क्योंकि खराब गाड़ियों के कारण उन्हें ड्यूटी के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था.

