रांची: झारखंड के सरकारी अस्पतालों की बदहाली और रेफरल सिस्टम पर उठते सवालों के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मीडिया के सामने एक नया मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सरकारी व्यवस्था का बचाव करते हुए निजी अस्पतालों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान किया और मीडिया को चुनौती दी है, कि वे कॉरपोरेट अस्पतालों में हो रहे शोषण को भी बेनकाब करें.
मीडिया के निशाने पर सिर्फ सरकारी डॉक्टर ही क्यों?
डॉ. अंसारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मीडिया केवल सरकारी अस्पतालों की खामियों को ही प्रमुखता से दिखाता है, जिससे दिन-रात काम करने वाले डॉक्टरों का मनोबल टूट रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में निजी अस्पताल मरीजों का सबसे ज्यादा शोषण कर रहे हैं, लेकिन वहां कोई आवाज नहीं उठाता. जो पत्रकार निजी अस्पतालों की खामियों और वहां के शोषण को उजागर करेगा, उसे हमारी सरकार विशेष अवॉर्ड देकर सम्मानित करेगी.
खराब एम्बुलेंस और स्टाफ की कमी पर एक्शन प्लान
सड़कों पर दौड़ती खटारा एम्बुलेंस और कर्मचारियों की कमी को स्वीकार करते हुए मंत्री ने भविष्य का रोडमैप साझा किया. उन्होंने कहा कि लाखों किलोमीटर चल चुकी पुरानी एम्बुलेंस को हटाकर जल्द ही नई एम्बुलेंस की खेप खरीदी जाएगी. राज्य के सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है, कि वे खाली पदों की सूची उपलब्ध कराएं, ताकि जल्द भर्ती की जा सके. व्यवस्था पर जनता का विश्वास बहाल करने के लिए मंत्री जल्द ही पाकुड़ में खुद ओपीडी लगाएंगे.
रेफरल का बड़ा कारण
सदर अस्पतालों से मरीजों को रिम्स रेफर किए जाने के सवाल पर मंत्री ने तर्क दिया, कि जब एक घायल के साथ 200-300 लोग अस्पताल पहुंचते हैं, तो डॉक्टर असुरक्षित महसूस करते हैं. डॉक्टरों को डर लगता है कि इलाज के दौरान कुछ ऊंच-नीच हुई तो भीड़ उन्हें मारेगी. इसी डर से वे मरीजों को रेफर कर देते हैं. अगर जनता सहयोग करे, तो इलाज वहीं संभव है.
सरकारी अस्पतालों को हाईटेक बनाने का वादा
मंत्री ने संकल्प दोहराया कि झारखंड के सरकारी अस्पतालों को कॉरपोरेट की तर्ज पर हाईटेक बनाया जाएगा. उन्होंने मीडिया और जनता से समय मांगते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही मरीजों को अस्पताल पहुंचने पर बेहतर माहौल, बेड और पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध होंगे.
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